मोदी और मर्ज़ ने ‘पतंग कूटनीति’ में भाग लिया; जर्मन चांसलर ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी

मोदी और मर्ज़ ने ‘पतंग कूटनीति’ में भाग लिया; जर्मन चांसलर ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी

मोदी और मर्ज़ ने ‘पतंग कूटनीति’ में भाग लिया; जर्मन चांसलर ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी
Modified Date: January 12, 2026 / 09:48 pm IST
Published Date: January 12, 2026 9:48 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

अहमदाबाद, 12 जनवरी (भाषा) जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने सोमवार को अहमदाबाद स्थित साबरमती आश्रम का दौरा किया और महात्मा गांधी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के नायक की शिक्षाओं की आज पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है।

भारत की अपनी पहली यात्रा पर आए मर्ज ने इसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ पतंग उड़ाई।

 ⁠

मर्ज ने कहा कि महात्मा गांधी की विरासत भारतीयों और जर्मनों को दोस्तों के रूप में एकजुट करती है।

प्रधानमंत्री मोदी और जर्मनी के चांसलर मर्ज ने सोमवार सुबह अहमदाबाद में साबरमती आश्रम पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने गुजरात के प्रसिद्ध पतंग महोत्सव का उद्घाटन किया। जर्मन चांसलर ने गांधीनगर शहर के पास स्थित प्रतिष्ठित बावड़ी ‘अडालज नी वाव’ का भी दौरा किया।

मर्ज़ के आगमन से कुछ मिनट पहले आश्रम पहुंचे मोदी ने जर्मन चांसलर का वहां पहुंचने पर स्वागत किया।

राष्ट्रपिता की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद दोनों नेताओं ने आश्रम के अंदर एक कमरे ‘हृदय कुंज’ का दौरा किया, जहां भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महात्मा गांधी और उनकी पत्नी कस्तूरबा रहते थे।

आश्रम में मर्ज ने यह भी देखा कि कैसे ‘चरखे’ का उपयोग करके खादी का सूत काता जाता है।

आश्रम की आगंतुक पुस्तिका में एक नोट में मर्ज ने कहा, ‘‘प्रत्येक व्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा की शक्ति में महात्मा गांधी का अटूट विश्वास आज भी हमें प्रेरित करता है। यह विरासत भारतीयों और जर्मनों को एक ऐसी दुनिया में दोस्तों के रूप में एकजुट करती है, जिसे गांधी की शिक्षाओं की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता हो सकती है।’’

गांधी आश्रम के नाम से भी मशहूर साबरमती आश्रम की स्थापना महात्मा गांधी ने 1917 में की थी। 1917 से 1930 तक यह गांधी जी का निवास रहा और भारत के स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख केंद्रों में से एक था।

ऐतिहासिक आश्रम में राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि देने के बाद दोनों नेता साबरमती रिवरफ्रंट पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव-2026 का उद्घाटन किया और बाद में चांसलर मर्ज के साथ पतंगबाजी का आनंद लिया।

कार्यक्रम स्थल पर मोदी और मर्ज ने महिला कारीगरों से बातचीत की और पतंग बनाने की प्रक्रिया को समझा। उद्घाटन के बाद दोनों नेताओं ने खुले वाहन में सफर किया और पतंग भी उड़ाई।

‘ऑपरेशन सिंदूर’, विशाल हनुमान जी और उनकी गदा, तिरंगा और अन्य आकृतियों से सजी पतंग नीले आकाश में उड़ रही थीं। मोदी और मर्ज़ द्वारा पतंग महोत्सव के उद्घाटन के अवसर पर अहमदाबाद के आसमान में राजनीति, कूटनीति और उत्सव का अनूठा संगम देखने को मिला।

गुजरात सरकार की एक विज्ञप्ति के अनुसार, 50 देशों के 135 पतंगबाज और भारत से लगभग 1,000 पतंग प्रेमी अहमदाबाद में अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव-2026 में भाग ले रहे हैं।

इसमें कहा गया कि महोत्सव के रूप में पतंगबाजों ने पिछले दो दिनों के दौरान राजकोट, सूरत, धोलावीरा (कच्छ में) और ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ (नर्मदा) जैसी जगहों का दौरा किया और आगंतुकों को पतंगबाजी से मंत्रमुग्ध कर दिया है। अहमदाबाद में यह महोत्सव 14 जनवरी तक जारी रहेगा।

यह त्योहार हर साल ‘उत्तरायण’ से पहले आयोजित किया जाता है, जिसे मकर संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है, जो 14 जनवरी को पड़ता है और सूर्य की उत्तर की ओर यात्रा तथा गर्मी के मौसम की ओर बढ़ने का प्रतीक है।

पिछले साल इस महोत्सव ने पूरे गुजरात में 3.83 लाख से अधिक आगंतुकों को आकर्षित किया था।

‘अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव’ के माध्यम से गुजरात पर्यटन आगंतुकों को धोलावीरा और ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ जैसे प्रमुख सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों की ओर आकर्षित कर रहा है।

विज्ञप्ति में कहा गया कि इस साल अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव देखने के लिए पांच लाख से अधिक पर्यटकों के गुजरात आने की उम्मीद है।

भाषा नेत्रपाल दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में