मोदी की डिग्री मामला: आदेश को चुनौती देने में देरी पर आपत्ति दाखिल करने के लिए डीयू को मिला समय

मोदी की डिग्री मामला: आदेश को चुनौती देने में देरी पर आपत्ति दाखिल करने के लिए डीयू को मिला समय

मोदी की डिग्री मामला:  आदेश को चुनौती देने में देरी पर आपत्ति दाखिल करने के लिए डीयू को मिला समय
Modified Date: February 10, 2026 / 04:46 pm IST
Published Date: February 10, 2026 4:46 pm IST

नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की स्नातक डिग्री के विवरण को सार्वजनिक किए जाने से इनकार करने वाले आदेश के खिलाफ अपील दायर करने में देरी पर आपत्ति दाखिल करने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) को मंगलवार को तीन हफ्ते का समय दिया।

डीयू की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि “मामले में कोई दम नहीं है” और “इसका मकसद केवल सनसनी फैलाना है।” उन्होंने एकल पीठ के अगस्त 2025 के आदेश को चुनौती देने वाली अपील दाखिल करने में हुई देरी के साथ-साथ मामले के गुण-दोष के पहलू पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।

मुख्य न्यायाशीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा, “जैसा कि आग्रह किया गया है, देरी के लिए माफी के अनुरोध वाले आवेदन पर आपत्ति दाखिल करने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया जाता है।”

इसी के साथ पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल के लिए निर्धारित कर दी।

अपीलकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय को देरी पर आपत्ति जताने की अनुमति दिए जाने के ढाई महीने बाद भी कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई है। उन्होंने कहा कि इसमें 15 से 45 दिनों की “मामूली” देरी हुई थी और अदालत इसे माफ कर सकती है।

अधिवक्ता ने कहा कि अगर डीयू मुख्य अपीलों का जवाब देना चाहता है, तो इस मामले में एक औपचारिक नोटिस जारी किया जाना चाहिए।

सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा, “किसी चीज को सनसनीखेज बनाने के लिए ही नोटिस जारी किया जा सकता है।”

दिल्ली उच्च न्यायालय में एक एकल पीठ के 25 अगस्त 2025 के उस आदेश को चुनौती देते हुए अपीलें दायर की गई हैं, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री सार्वजनिक किए जाने के केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के फैसले को रद्द कर दिया गया था।

ये अपील आरटीआई कार्यकर्ता नीरज, आम आदमी पार्टी (आप) के नेता संजय सिंह और अधिवक्ता मोहम्मद इरशाद की ओर से दायर की गई हैं।

एकल पीठ ने सीआईसी का फैसला यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि केवल इसलिए कि प्रधानमंत्री मोदी एक सार्वजनिक पद पर हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी सभी “व्यक्तिगत जानकारियां” सार्वजनिक रूप से प्रकट किए जाने योग्य हैं।

भाषा पारुल दिलीप

दिलीप


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