झारखंड में 2,500 रुपये के मासिक अनुदान से असहमति की आवाज दबाई गई : सुदेश महतो

झारखंड में 2,500 रुपये के मासिक अनुदान से असहमति की आवाज दबाई गई : सुदेश महतो

झारखंड में 2,500 रुपये के मासिक अनुदान से असहमति की आवाज दबाई गई : सुदेश महतो
Modified Date: February 8, 2026 / 06:57 pm IST
Published Date: February 8, 2026 6:57 pm IST

रांची, आठ फरवरी (भाषा) ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के प्रमुख सुदेश महतो ने रविवार को आरोप लगाया कि राज्य में विकास कार्य ठप्प हो गए हैं, लेकिन लोग इसके खिलाफ आवाज नहीं उठा रहे हैं क्योंकि मैय्या सम्मान योजना के तहत मिलने वाले 2,500 रुपये के मासिक अनुदान ने लोगों को चुप करा दिया है।

महतो ने रांची में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि खनिज संपदा से भरपूर झारखंड को अब देश में ‘श्रमिक राज्य’ के रूप में जाना जाता है।

आजसू के प्रमुख ने कहा, ‘‘यहां नौकरियों के अवसर न के बराबर हैं। झारखंड के एक लाख से अधिक आदिवासी, दलित और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय के लोग केवल दिल्ली में ही मजदूर के रूप में काम कर रहे हैं। ग्रामीण युवाओं को आजीविका की तलाश में बड़ी संख्या में गोवा, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।’’

महतो ने कहा कि इस स्थिति के बावजूद, लोग अपनी आवाज नहीं उठा रहे हैं क्योंकि राज्य में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा दिए गए वित्तीय अनुदान ने उन्हें चुप करा दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘सड़क निर्माण और नल के पानी की आपूर्ति जैसे कई काम ठप्प हो गए हैं। लेकिन कोई भी आवाज नहीं उठा रहा है क्योंकि सरकार ने महिला सशक्तीकरण के नाम पर उन्हें 2,500 रुपये प्रति माह देकर चुप करा दिया है।’’

महतों ने कहा कि लोगों को अब सोचना होगा कि क्या वे ऐसी सरकार चाहते हैं जो विकास को नजरअंदाज करे।

भाषा रवि कांत रवि कांत अमित

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