नगालैंड सरकार ने वंदे मातरम् के अनिवार्य गायन के खिलाफ प्रदर्शन वापस लेने की अपील की

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नगालैंड सरकार ने वंदे मातरम् के अनिवार्य गायन के खिलाफ प्रदर्शन वापस लेने की अपील की

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  • Publish Date - September 3, 2026 / 03:11 PM IST,
    Updated On - September 3, 2026 / 03:11 PM IST

कोहिमा, तीन सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के अनिवार्य रूप से गायन के खिलाफ विधानसभा के बाहर नगा स्टूडेंट्स फेडरेशन (एनएसएफ) का विरोध प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। वहीं, सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया गया।

एनएसएफ सदस्यों ने केंद्र सरकार के फैसले का विरोध करते हुए ‘‘व्हेन द रोल इज कॉल्ड अप यॉन्डर’’, ‘‘ऑनवर्ड, क्रिश्चियन सोल्जर्स’’ और ‘‘आई हैव डिसाइडेड टू फॉलो जीसस’’ जैसे गीत गाए।

वंदे मातरम् के गायन का मुद्दा विधानसभा में उठाते हुए, नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के विधायक और एनएसएफ के पूर्व अध्यक्ष अचंबेमो किकोन ने कहा कि यह आंदोलन किसी खास निर्वाचन क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राज्य से संबंधित है।

उन्होंने कहा कि विवाद वंदे मातरम् के अनिवार्य गायन को लेकर है और इस पर सदन में पहले ही काफी चर्चा हो चुकी है।

किकोन ने कहा कि मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने विभिन्न आदिवासी और राजनीतिक समूहों से जुड़े विधायकों की भावनाओं के साथ-साथ चर्च, नागरिक समाज संगठनों, आदिवासी संगठनों और एनएसएफ की राय पर गंभीरता से विचार किया है।

किकोन ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी को एक आदेश जारी कर राज्यों से कहा था कि वे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में अहम वीवीआईपी के आने पर — जिसमें विधानसभा में राज्यपाल का आगमन भी शामिल है — वंदे मातरम् अनिवार्य गायन कराएं।

उन्होंने कहा कि इसके बाद यह मामला एक ऐसी समिति को सौंपा गया, जिसे संविधान के अनुच्छेद 371ए के तहत संसद द्वारा पारित कानूनों को नागालैंड में लागू करने की संभावनाओं की जांच के लिए बनाया गया था।

संसदीय कार्य मंत्री के.जी. केन्ये की अध्यक्षता वाली समिति इस मामले का अध्ययन कर रही है और उम्मीद है कि वह मौजूदा सत्र के दौरान अपनी रिपोर्ट सौंप देगी।

हालांकि, किकोन ने कहा कि राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के लागू होने के कारण कानूनी स्थिति की नए सिरे से पड़ताल करना जरूरी हो गया है।

उन्होंने एनएसएफ से अपना आंदोलन वापस लेने की अपील करते हुए कहा कि उनकी चिंताओं पर उपयुक्त मंच पर विचार किया जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार की ओर से और एनएसएफ के पूर्व अध्यक्ष के तौर पर मैं एनएसएफ के साथियों से अपील करना चाहता हूं कि वे कृपया अपना आंदोलन वापस ले लें।’’

हालांकि, केन्ये ने समिति का पक्ष रखते हुए इस मुद्दे को ‘‘बहुत विवादित’’ और ‘‘अत्यंत संवेदनशील’’ बताया। उन्होंने खासकर अनुच्छेद 371ए और अन्य संवैधानिक प्रावधानों का संदर्भ दिया।

नगालैंड के एकमात्र लोकसभा सदस्य, एस. सुपोंगमेरेन जमीर ने प्रदर्शन स्थल का दौरा किया और प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि वह इस मामले को केंद्र के समक्ष उठाएंगे।

भाषा सुभाष वैभव

वैभव