प्रयागराज, एक अप्रैल (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बरेली के रहने वाले एक व्यक्ति द्वारा घर में नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दिये जाने को लेकर दायर याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अपनी संपत्ति पर नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा नहीं करेगा।
उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के अधिकारियों को याचिकाकर्ता तारिक खान और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ 16 जनवरी, 2026 को जारी किए गए पुलिस चालान को तुरंत वापस लेने का निर्देश भी दिया।
तारिख खान के रिश्तेदार हसन खान की संपत्ति पर नमाज अदा की जा रही थी, जिसके लिए पुलिस ने चालान जारी किया था।
न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ ने 25 मार्च को दिये आदेश में कहा कि अगर याचिकाकर्ता वचन का उल्लंघन करता है, ‘संपत्ति पर नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा करता है और अगर इससे क्षेत्र में शांति- व्यवस्था को खतरा होता है, तो अधिकारी कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं।
अदालत ने बरेली के जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को जारी अवमानना नोटिस भी रद्द कर दिया।
दोनों अधिकारी 25 मार्च को पूर्व आदेश के अनुपालन में उच्च न्यायालय के समक्ष पेश हुए और हलफनामे दाखिल किए।
उच्च न्यायालय ने 11 मार्च के अपने निर्देश के तहत हसीन खान को दी गई सुरक्षा तत्काल वापस लेने का निर्देश दिया था।
हसीन खान ने याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत से अनुरोध किया था कि उनके परिवार और संपत्ति की सुरक्षा की जाए।
अतिरिक्त महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने अदालत को बताया कि हसीन खान सुरक्षा का ‘दुरुपयोग’ कर रहा है और उनकी संपत्ति पर प्रतिदिन कम से कम 52 से 62 लोग नमाज अदा कर रहे हैं।
उन्होंने इस दावे को पुष्ट करने के लिए हलफनामों के साथ संलग्न संपत्ति की तस्वीरें रिकॉर्ड पर रखीं।
त्रिवेदी ने कहा कि अगर इस तरह की प्रथा जारी रहने दी गई, तो यह क्षेत्र की शांति- सुव्यवस्था के लिए हानिकारक होगी।
उन्होंने कहा कि अगर कानून-व्यवस्था में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना है, तो राज्य अधिकारियों के पास कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
अदालत ने इन दलीलों को ध्यान में रखते हुए याचिकाकर्ता के वकील के इस वचन को रिकॉर्ड पर ले लिया कि वे संपत्ति पर नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा नहीं करेंगे।
खंडपीठ ने टिप्पणी की, “हमें आशा और विश्वास है कि याचिकाकर्ता अपने द्वारा दिए गए वचन का पालन करेगा।”
अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील की इस दलील पर भी ध्यान दिया कि हसीन खान को अब किसी सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है, जिसके परिणामस्वरूप राज्य अधिकारियों को याचिकाकर्ता को दी गई सुरक्षा वापस लेने का निर्देश दिया गया। इसके साथ ही, उच्च न्यायालय ने तारिक खानी द्वारा दायर रिट याचिका का निपटारा कर दिया।
भाषा सं राजेंद्र जितेंद्र
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