असम में भाजपा कार्यकर्ताओं की शिकायत पर लाखों ‘संदिग्ध मतदाताओं’ के नाम हटाए गए: हिमंत
असम में भाजपा कार्यकर्ताओं की शिकायत पर लाखों ‘संदिग्ध मतदाताओं’ के नाम हटाए गए: हिमंत
गुवाहाटी, 11 फरवरी (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बुधवार को दावा किया कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआर) के दौरान लाखों ‘संदिग्ध मतदाताओं’ के नाम हटा दिए गए।
शर्मा ने कहा कि यह नाम एसआर के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं की शिकायतों के आधार पर हटाए गए।
शर्मा की यह टिप्पणी निर्वाचन आयोग द्वारा असम की अंतिम मतदाता सूची जारी किए जाने के एक दिन बाद आई है। आयोग ने मसौदा सूची से 2.43 लाख से अधिक नाम हटाए हैं।
शर्मा ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, “यह तो बस शुरुआत है। विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान ऐसे और लोगों के नाम हटाए जाएंगे।”
उन्होंने कहा, ‘‘जहां तक संभव हो सका, हमारी पार्टी के सदस्यों ने शिकायतें दर्ज कराईं। इन्हीं के आधार पर नाम हटाए गए हैं।’’
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि असम समझौते पर हस्ताक्षर के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोगों ने हमें धमकाने और डराने की कोशिश की, लेकिन हम आगे बढ़े और कामयाब हुए। हमारे भाजपा कार्यकर्ताओं ने बूथ स्तर के अधिकारियों को यह विश्वास दिलाया कि जिन लोगों के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई गई थीं, वे अब राज्य के निवासी नहीं हैं। हमने इस काम में बहुत मेहनत की। ’’
दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंगलवार को असम की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई, जिसमें कुल 2.49 करोड़ मतदाता शामिल हैं। यह संख्या मसौदा सूची की तुलना में 0.97 प्रतिशत कम है।
शर्मा ने यह भी कहा, “अवैध बांग्लादेशी मुस्लिम (प्रवासियों) के खिलाफ युद्ध जारी रहेगा।”
मुख्यमंत्री ने पहले संकेत दिया था कि विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान केवल ‘मियां’ समुदाय के लोगों को ही नोटिस भेजा गया, ताकि उन्हें ‘‘दबाव में रखा जा सके’’, और कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा ‘‘अवैध बांग्लादेशियों’’ के खिलाफ पांच लाख से अधिक शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।
‘मियां’ शब्द मूल रूप से असम में बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए अपमानजनक रूप में प्रयोग किया जाता था, और गैर-बांग्ला भाषी लोग उन्हें आमतौर पर बांग्लादेशी अप्रवासी मानते हैं। हाल के वर्षों में, इस समुदाय के कुछ कार्यकर्ताओं ने इसे विरोध और हिम्मत के प्रतीक के रूप में अपनाया है।
राज्य में विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया विवादों में रही, विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि इसका इस्तेमाल ‘‘वोट चोरी’’ के लिए किया जा रहा है और मूल नागरिकों, खासकर धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को परेशान किया गया।
भाषा खारी पवनेश
पवनेश

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