राष्ट्रगीत को आजादी के 75 साल बाद कानूनी संरक्षण की जरूरत नहीं होनी चाहिए थी :रास में सदस्यों ने कहा

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राष्ट्रगीत को आजादी के 75 साल बाद कानूनी संरक्षण की जरूरत नहीं होनी चाहिए थी :रास में सदस्यों ने कहा

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  • Publish Date - July 29, 2026 / 03:44 PM IST,
    Updated On - July 29, 2026 / 03:44 PM IST

नयी दिल्ली, 29 जुलाई (भाषा) राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान और गरिमा को बनाए रखने के उद्देश्य से लाए गए राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पर बुधवार को राज्यसभा में चर्चा के दौरान सदस्यों ने राष्ट्र प्रतीकों के सम्मान के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई तथा कहा कि राष्ट्रगीत को आजादी के 75 साल बाद कानूनी संरक्षण की जरूरत नहीं होनी चाहिए थी।

विधेयक में राष्ट्रगीत के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने और दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों के प्रावधान हैं।

उच्च सदन में इस विधेयक पर हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा के राधामोहन दास अग्रवाल ने कहा कि पिछले 123 साल से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा कहलाने वाले राष्ट्रगीत का बार-बार अपमान हुआ।

यह विधेयक सदन में 24 जुलाई को पेश किया गया था। लेकिन नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के मुद्दे पर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण उच्च सदन की कार्यवाही में बार-बार व्यवधान होने के कारण इस विधेयक पर चर्चा नहीं हो पाई।

इस विधेयक पर सदन में चर्चा आज हुई जिसमें हिस्सा लेते हुए भाजपा सदस्य अग्रवाल ने कहा कि क्रांतिकारियों को अपमानित करने के लिए ‘‘वंदे मातरम’’ का अपमान किया जाता था लेकिन आज जोश भर देने वाले राष्ट्रीय प्रतीक ही अपमानित हो जाते हैं।

दास ने कहा कि राष्ट्रगीत को आजादी के 75 साल बाद कानूनी संरक्षण की जरूरत नहीं होनी चाहिए थी।

वाईआरएस कांग्रेस पार्टी के गोला बाबूराव ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान हमारे संस्कारों पर भी सवाल उठाता है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

उन्होंने कहा कि पिंगली वेंकैया ने हमारे देश के राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगे) का मूल डिजाइन तैयार किया था, जिसके आधार पर वर्तमान भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तैयार किया गया। ‘‘पिंगली वेंकैया राष्ट्रीय प्रतीक हैं।’’

उन्होंने मांग की कि पिंगली वेंकैया के परिजन आज बेहद कठिनाई का सामना कर रहे हैं और उनकी मदद की जानी चाहिए।

राजद के मनोज कुमार झा ने कहा ‘‘पहली बार देख रहा हूं कि राष्ट्रीय गान को राष्ट्रीय गीत के सामने खड़ा किया जा रहा है।’’

बीआरएस के रविचंद्र वद्दीराजू ने कहा, ‘‘समय को देखते हुए यह विधेयक अनिवार्य लगता है। हर राज्य में और देश में राष्ट्रीय प्रतीक हैं लेकिन हम आपसी प्रतिद्वंद्विता में, निहित स्वार्थ के चलते उनका अपमान करते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।’’

तेदेपा के विजय चिंताकायला ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि देश सर्वोपरि है और इसके सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि ‘‘वंदे मातरम’’ का जयघोष करते हुए कितने लोगों ने बलिदान दिए हैं, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

भाजपा के मयंक कुमार नायक ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा रचित ‘‘वंदे मातरम्’’ ने राष्ट्रभक्ति की भावना के प्रसार में कालजयी भूमिका निभाई है। ‘‘सवाल यह है कि देश की आजादी के 75 साल के बावजूद वंदे मातरम को कानूनी संरक्षण क्यों नहीं मिल पाया?’’

कांग्रेस को निशाना बनाते हुए नायक ने इसके लिए पार्टी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा ‘‘वंदे मातरम् कांग्रेस का, भाजपा का या अन्य किसी दल का नहीं है बल्कि यह हम सबका है।’’

शिवसेना की डॉ ज्योति नागनाथ वाघमारे ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं है बल्कि यह गुलामी की जंजीरों को तोड़ कर निकलने वाली आजादी की हुंकार है जिसका हर हाल में सम्मान किया जाना चाहिए।

आरपीआई के रामदास आठवले ने कहा कि वंदे मातरम् ने ही गांव-गांव में आजादी की अलख जगाई थी।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री आठवले ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में जगह-जगह लगाया जाने वाला ‘‘वंदे मातरम्’’ का नारा आज भी प्रासंगिक है क्योंकि यह याद दिलाता है कि हमारा देश, हमारी मातृभूमि और हमारा संविधान सबसे ऊपर हैं।

बीजद की सुलता देव ने कहा, ‘‘मतभेद कितने भी हों, लेकिन जब देश की बात आती है तो मतभेद खत्म हो जाते हैं। इस गाने के रचयिता बंकिमचंद्र चटर्जी कभी ओडिशा के जाजपुर जिले के उप जिलाधिकारी थे।’’

उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् को ज्यादातर लोग सही नहीं गाते और किताबों में भी इसके प्रकाशन में गलतियां होती हैं। ‘‘इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए।’’

आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय पर कई साल तक राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया गया।

उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् का मतलब ‘‘भारत माता की जय’’ होता है लेकिन राष्ट्रीय राजधानी में भारत माता की बेटियों पर बल प्रयोग होता है। ‘‘मातृ भूमि की वंदना तब होगी जब देश के बेटे-बेटियों का, किसानों का और मजदूरों का सम्मान किया जाएगा।’’

भाजपा के अशोक कुमार मित्तल ने कहा कि हमारा तिरंगा, संविधान, राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान देश के 140 करोड़ से अधिक लोगों को एक सूत्र में बांधते हैं और ये सम्मान के हकदार हैं।

अन्नाद्रमुक सदस्य एम थंबीदुरै ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

विधेयक पर चर्चा के दौरान व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने कहा कि गृह मंत्री सदन में आएं और बयान दें।

उपसभापति हरिवंश ने इसे खारिज कर दिया। व्यवस्था का प्रश्न उठाने वाले अन्य सदस्यों से हरिवंश ने कहा कि जब सदन में व्यवस्था नहीं होती तब व्यवस्था का प्रश्न नहीं उठाया जा सकता।

विपक्षी सदस्य पिछले सप्ताह नीट प्रश्नपत्र लीक मामले के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग करते हुए हंगामा कर रहे थे। बाद में विपक्षी सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए।

भाषा

मनीषा अविनाश

अविनाश