श्रमिक संगठनों की देशव्यापी हड़ताल: पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया
श्रमिक संगठनों की देशव्यापी हड़ताल: पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया
चंडीगढ़, 12 फरवरी (भाषा) केंद्रीय श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच से जुड़े कर्मचारियों और श्रमिकों ने बृहस्पतिवार को पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में केंद्र सरकार के श्रम सुधार और आर्थिक नीतियों के विरोध में प्रदर्शन किया।
केंद्र की नीतियों को ‘कॉरपोरेट समर्थक’ बताते हुए श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने चंडीगढ़ के सेक्टर-17 में धरना-प्रदर्शन में हिस्सा लिया और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों के हाथों में ‘‘हम श्रम संहिताओं को खारिज करते हैं’’ और ‘‘हम श्रमिक-विरोधी श्रम संहिताओं का विरोध करते हैं’’ जैसे संदेश वाले पोस्टर थे।
लुधियाना में पंजाब बैंक इम्प्लॉयीज फेडरेशन (पीबीईएफ) ने भारत नगर चौक पर एक विशाल रैली आयोजित की।
हरियाणा के सोनीपत, रोहतक और हिसार सहित कई स्थानों पर भी प्रदर्शन हुए। हालांकि राज्य के अधिकांश स्थानों पर बैंक और राज्य परिवहन की बस सेवाएं सामान्य रहीं।
सोनीपत में अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि बस अड्डा परिसर में आयोजित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी देखने को मिली।
उन्होंने दावा किया कि मानेसर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, बावल और धारूहेड़ा के औद्योगिक क्षेत्रों के कई श्रमिक हड़ताल में शामिल हुए। आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन में भाग लिया।
लांबा ने कहा कि शहरी स्थानीय निकाय, बिजली, पर्यटन, सिंचाई, स्वास्थ्य और राजस्व जैसे राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में भी हड़ताल का असर देखा गया। राज्य परिवहन कर्मचारियों ने भी विभिन्न बस डिपो में सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक दो घंटे का विरोध प्रदर्शन किया।
पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल और तमिलनाडु सहित कई हिस्सों में भी श्रमिक संगठनों ने प्रदर्शन किया।
श्रमिक संगठनों की प्रमुख मांगों में चार श्रम संहिताओं और उनके नियमों को रद्द करना, बीज विधेयक और बिजली संशोधन विधेयक के मसौदे को वापस लेना तथा ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया’ (शांति) अधिनियम को निरस्त करना शामिल है।
वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता 2020 समेत चार श्रम संहिताएं हैं।
मजदूर संघ मनरेगा की बहाली और ‘विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ को निरस्त करने की भी मांग कर रहा हैं।
विभिन्न स्थानों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया।
पीबीईएफ के महासचिव पी.आर. मेहता ने लुधियाना में आयोजित प्रदर्शन में आरोप लगाया कि नई श्रम संहिताएं हड़ताल के अधिकार को सीमित करती हैं और ठेके पर दिए गए रोजगार को बढ़ावा देती हैं, जिससे ‘हायर एंड फायर’ को आसान बनाकर रोजगार को असुरक्षित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बैंक कर्मचारी अन्य क्षेत्रों के श्रमिकों के साथ मिलकर इन बदलावों का लोकतांत्रिक तरीके से कड़ा विरोध करेंगे।
एक श्रमिक संगठन के नेता डा. राजिंदर पाल सिंह औलख ने कहा कि नई संहिताओं से बड़ी संख्या में श्रमिक श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे।
पीबीईएफ लुधियाना के सचिव नरेश गौर ने कहा कि श्रम संहिताएं श्रमिकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा की कीमत पर बड़े कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई हैं।
उन्होंने सरकार से इन संहिताओं को तुरंत वापस लेने और श्रमिक संगठनों के साथ संवाद करने की मांग की।
गौर ने कहा कि भारी बेरोजगारी के दौर में सरकार अधिक रोजगार सृजित करने के बजाय निश्चित अवधि के रोजगार की योजना ला रही है, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित होगा।
उन्होंने बैंकों के निजीकरण और विनिवेश की प्रक्रिया को रोकने, बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की हालिया वृद्धि वापस लेने और सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों के विलय के प्रस्ताव को वापस लेने की भी मांग की।
संयुक्त मंच में ‘इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस’ (इंटक), ‘ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस’ (एटक), ‘हिंद मजदूर सभा’ (एचएमएस), ‘सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस’ (सीटू), ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर, सेल्फ एम्प्लॉयड विमेन्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस, लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस शामिल हैं।
भाषा
राखी संतोष
संतोष

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