कोशिकाओं में कोरोना वायरस के प्रवेश को रोक सकते हैं प्राकृतिक खाद्य परिरक्षक कण

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कोशिकाओं में कोरोना वायरस के प्रवेश को रोक सकते हैं प्राकृतिक खाद्य परिरक्षक कण

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  • Publish Date - November 11, 2020 / 10:17 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:42 PM IST

नयी दिल्ली, 11 नवंबर (भाषा) कंप्यूटर पर विश्लेषण के जरिए भारतीय वैज्ञानिकों ने पाया है कि प्राकृतिक खाद्य परिरक्षक छोटे कणों में प्रोटीन को मजबूती से बांधने की क्षमता होती है और यह कोविड-19 संक्रमण को रोक सकता है। कोरोना वायरस इसी प्रोटीन के रास्ते इंसानों की कोशिकाओं में प्रवेश करता है, इसलिए मार्ग अवरूद्ध करने पर संक्रमण रोका जा सकता है ।

पत्रिका ‘वॉयरोलॉजी’ में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि खाद्य श्रेणी वाले जीवाणु रोधी छोटे प्रोटीन (पेप्टाइड) निसन में इंसानों के भीतर पाए जाने वाले प्रोटीन एसीई2 को बांधने की क्षमता होती है और इसी के जरिए कोरोना वायरस कोशिकाओं में प्रवेश करता है। निसिन को वैश्विक तौर पर सुरक्षित और प्राकृतिक खाद्य परिरक्षक माना जाता है।

अध्ययन के सह लेखक विश्व भारती विश्वविद्यालय के स्वदेश रंजन बिस्वास ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘पेप्टाइड निसिन में एसीई2 में प्रवेश करने वाले प्रोटीन को बांधने की क्षमता होती है। नोवेल कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन से ये ज्यादा कारगर होते हैं।’’

विश्लेषण के आधार पर वैज्ञानिकों का मानना है कि पेप्टाइड इंसानों में एसीई2 कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन को खत्म कर सकता है और यह संक्रमण को रोकने में मददगार हो सकता है ।

अध्ययनकर्ताओं ने लिखा है, ‘‘वायरल स्पाइक प्रोटीन के रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन (आरबीडी) की तुलना में निसिन एचएसीई2 को ज्यादा प्रभावी तरीके से बांध सकता है।’’

इस अध्ययन के संबंध में तमिलनाडु में शास्त्र विश्वविद्यालय के जैव सूचना विज्ञान के प्रोफेसर विग्नेश्वर रामकृष्णन ने कहा, ‘‘यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि खाद्य परिरक्षक निसिन में एचएसीई2 रिसेप्टर को बांधने की क्षमता है और यह आरबीडी को बांधने का काम कर सकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘बीमारी के खिलाफ मौजूदा दवाओं के इस्तेमाल का प्रभाव देखने की तरफ वैज्ञानिक बिरादरी का ध्यान गया है। हालांकि इस संबंध में आगे और परीक्षण करने और इसे इस्तेमाल में लाने की विधि पर अध्ययन करने की जरूरत है।’’ अमीनो अम्लों की छोटी श्रृंखलाओं को पेप्टाइड कहते हैं। कई पेप्टाइड मिलकर प्रोटीन का गठन करते हैं।

अध्ययन में बिस्वास और उनकी टीम ने पाया कि जीवाणु लेक्टोकोकस लेसिट्स के यूनिक कल्चर का इस्तेमाल चीज़ के उत्पादन में होता है और यह दूध को दही और निसिन में बदलने में सक्षम है। चूंकि गर्मी में भी निसिन सुरक्षित रहता है इसलिए बिस्वास का मााना है कि किफायती तौर पर इसका उत्पादन हो सकता है। बिस्वास ने कहा कि अध्ययन से इंसानी एसइई2 रिसेप्टर को अवरूद्ध करने के लिए अन्य खाद्य पेप्टाइड का पता लगाने को प्रोत्साहन मिलेगा।

भाषा आशीष मनीषा

मनीषा