एनसीईआरटी की नौवीं कक्षा की नयी पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका को निष्पक्ष संस्था बताया गया

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एनसीईआरटी की नौवीं कक्षा की नयी पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका को निष्पक्ष संस्था बताया गया

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  • Publish Date - June 26, 2026 / 06:19 PM IST,
    Updated On - June 26, 2026 / 06:19 PM IST

नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा) राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की आठवीं कक्षा की एक पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका की छवि खराब किये जाने से जुड़े आरोप को लेकर विवाद पैदा होने के कुछ महीनों बाद, नौवीं कक्षा की एक नयी पाठ्यपुस्तक में इसे ‘‘एक ऐसी निष्पक्ष और स्वतंत्र संस्था’’ बताया गया है, जो ‘‘नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है और संविधान की भावना को अक्षुण्ण रखती है।’’

हालांकि, नौवीं कक्षा की नयी पाठ्यपुस्तक, आठवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक को लेकर पैदा हुए विवाद से पहले ही तैयार कर ली गई थी।

सामाजिक विज्ञान की नयी पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका के अलग-अलग कार्यों के बारे में बताया गया है। इसमें कहा गया है कि यह सरकार के फैसलों और संविधान संशोधनों की समीक्षा करती है, असंवैधानिक कानूनों को रद्द कर सकती है, संविधान को अक्षुण्ण रखती है तथा ‘‘लोकतांत्रिक मूल्यों और समाज के सभी वर्गों के अधिकारों की रक्षा करने एवं उन्हें बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाती है।’’

लोकतंत्र पर आधारित अध्याय में ‘शक्तियों का पृथक्करण’ नामक खंड में, पाठ्यपुस्तक इस बात पर जोर देती है कि न्यायपालिका समय-समय पर जनहित याचिका पर विचार करती है ताकि सभी को न्याय मिल सके।

फरवरी में, एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इस पुस्तक में एक अध्याय में ‘‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’’ पर एक खंड शामिल था।

उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद, पाठ्यपुस्तक की प्रतियां वापस ले ली गईं और इसके डिजिटल प्रारूप को भी हटा दिया गया । एनसीईआरटी ने माफी भी मांगी थी।

भाषा सुभाष राजकुमार

राजकुमार