रायपुरः CG News बीजेपी ने एक देश-एक कानून की राह पर आगे बढते हुए सभी बीजेपी शासित राज्यों में UCC पर कदम बढ़ा दिए हैं। उत्तराखंड, गुजरात, असम के बाद मध्यप्रदेश, राजस्थान के साथ छत्तीसगढ़ में UCC पर कमेटियां बनाकर राज्यों में UCC लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। विपक्ष इसे बीजेपी का चुनावी ऐजेंडा बताकर सियासी प्रपंच, गैर-जरूरी बता रहा है तो वहीं भाजपा, कांग्रेस की समझ पर सवाल उठाकर इसे वक्त की जरूरत बता रहा है।
छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में साय सरकार ने कदम बढ़ा दिए हैं। गुरुवार शाम को राज्य सरकार ने यूसीसी के अध्ययन, सुझाव और प्रारूप तैयार करने, एक उच्चस्तरीय समिति का गठित कर दी है। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई करेंगी, जबकि शत्रुघ्न सिंह, एम.के. राउत, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह इसके कमेटी के सदस्य हैं। एक तरफ सरकार की तैयारी है तो दूसरी तरफ विपक्ष का विरोध पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने UCC को पेंचीदा विषय बताते हुए इसे गैर जरूरी बताया। कहा UCC सत्ता बचाने भाजपा का प्रपंच मात्र है। वहीं दूसरी तरफ वरिष्ठ कांग्रेसी नेता धनेंद्र साहू ने आदिवासियों के अधिकारों की दुहाई देते हुए, सबके लिए एक से कानून को उचित नहीं बताया।
इधर, विपक्ष की आपत्तियों सिरे प्रदेश सरकार ने सिरे खारिज किया। छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने दावा किया कि आदिवासी समाज UCC से प्रभावित नहीं होगा। UCC किसी भी आदिवासी परम्परा को प्रभावित नहीं करेगा। देश में सबके लिए एक कानून जरूरी है। इससे लव जिहाद, धर्मांतरण जैसी घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। उत्तराखंड, गुजरात, असम और गोवा के बाद अब मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में UCC पर सरकारें आगे बढ़ चुकी हैं। बीजेपी का स्पष्ट मानना है कि देश में सबके लिए एक कानून जरूरी है इससे कई कुरीतियां और अपराधों पर लगाम कसने में मदद मिलेगी, जबकि विपक्ष बार-बार आदिवासियों के अधिकार और विविधता के बहाने इसके विरोध में है, सवाल ये है, जब सरकार बार-बार ये साफ कर चुकी है कि UCC से आदिवासियों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे तो फिर विपक्ष की असल आपत्ति किस बात पर है?