एनडीएमसी ने कबूतरों, आवारा कुत्तों के लिए भोजन स्थलों की पहचान की

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एनडीएमसी ने कबूतरों, आवारा कुत्तों के लिए भोजन स्थलों की पहचान की

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  • Publish Date - April 20, 2026 / 06:21 PM IST,
    Updated On - April 20, 2026 / 06:21 PM IST

नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा) नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के समक्ष एक अनुपालन रिपोर्ट पेश की है जिसमें कबूतरों, बंदरों, मवेशियों और आवारा कुत्तों को खाना खिलाने की प्रक्रिया को विनियमित करने तथा स्वच्छता संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा दिया गया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि एनडीएमसी ने एनजीटी के समक्ष शुक्रवार को पेश की गई रिपोर्ट में अपने क्षेत्र में कबूतरों को दाना डालने के लिए निर्धारित स्थानों की पहचान की है और कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि वे गंदगी फैलाने वाले लोगों को नियमित रूप से दंडित करें।

रिपोर्ट में कहा गया है, “कबूतरों को दाना डालने के लिए निर्धारित स्थानों की पहचान के तीन महीने के दौरान इस साल जनवरी में 23, फरवरी में 14 और मार्च में 39 चालान काटे गए। गंदगी पैदा करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ नियमित रूप से चालान जारी करने के निर्देश दिए गए।”

इसमें कहा गया है कि प्रवर्तन विभाग ने संबंधित क्षेत्रों से अनधिकृत विक्रेताओं को हटा दिया है और वहां नियमित रूप से साफ-सफाई की जा रही है।

रिपोर्ट में आवारा कुत्तों के संबंध में कहा गया है कि एनडीएमसी ने पालिका एबीसी सोसाइटी की मदद से उन्हें (आवारा कुत्ते) भी खाना खिलाने की प्रक्रिया को विनियमित करने की दिशा में कदम उठाए हैं, जिनके तहत लगभग 100 भोजन केंद्र चिन्हित किए गए हैं और इतनी ही संख्या में दिशा-निर्देश बोर्ड लगाए गए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, रेसिडेंट वेलफेयर सोसायटी (आरडब्ल्यूए) के साथ जागरूकता अभियान चलाए गए हैं और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी की जा रही है।

इसमें कहा गया है कि बंदरों और मवेशियों को खाना खिलाने से रोकने और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं, जिनमें विभिन्न जगहों पर नुक्कड़ नाटकों सहित अन्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन और सोशल मीडिया एवं आधिकारिक वेबसाइट पर संदेशों का प्रसार शामिल है।

रिपोर्ट के अनुसार, एनडीएमसी ने बंदरों को पकड़ने के लिए एक अधिकृत एजेंसी को नियुक्त किया है। इसमें कहा गया है कि अब तक 2,000 से अधिक बंदरों को पकड़ा जा चुका है और उनका पुनर्वास किया गया है।

एनडीएमसी ने कहा, “पकड़े गए बंदरों को सुरक्षित रूप से ले जाया जाता है और पशु चिकित्सा प्रमाण पत्र मिलने के बाद उन्हें छोड़ दिया जाता है।”

नगर निकाय ने कहा कि बंदरों को खाना खिलाने और कचरा फैलाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भी चार चालान काटे गए हैं।

भाषा पारुल नरेश

नरेश