हिंदू धर्मग्रंथों में वर्णित ‘तकनीकी शब्दों’ पर व्यापक शोध और प्रकाशन की आवश्यकता : होसबाले
हिंदू धर्मग्रंथों में वर्णित 'तकनीकी शब्दों' पर व्यापक शोध और प्रकाशन की आवश्यकता : होसबाले
नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने बृहस्पतिवार को विभिन्न हिंदू धर्मग्रंथों में वर्णित ‘धर्म’ जैसे “तकनीकी शब्दों” पर व्यापक शोध करने और उनके अर्थों को प्रकाशित करने की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि लोग उनके सही मायनों को समझ सकें।
होसबाले ने भाजपा के पूर्व सांसद तरुण विजय द्वारा लिखित पुस्तक “मंत्र विप्लव” के विमोचन के लिए यहां आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि वर्षों से एक एजेंडे के तहत ‘मंत्र विप्लव’ के निर्माण के लिए लोगों के दिमाग में ऐसे शब्दों के विकृत अर्थ डालकर देश और उसकी पहचान को नुकसान पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
आरएसएस के दूसरे सबसे बड़े नेता ने इसका अर्थ समझाते हुए कहा, “मंत्र विप्लव” शब्द का अर्थ ‘संभ्रम’ (वैचारिक भ्रम) है।
महाभारत की एक घटना का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “धृतराष्ट्र को इस शब्द का अर्थ समझाते हुए विदुर ने कहा कि जब ‘मंत्र विप्लव’ होता है, तो यह राजा से लेकर उसकी प्रजा तक सब कुछ नष्ट कर देता है क्योंकि यह व्यक्ति की सही और गलत के बीच अंतर करने की क्षमता छीन लेता है।”
उन्होंने आगे कहा कि वर्षों से हमारे देश में इस तरह के ‘मंत्र विप्लव’ बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य सच्चाई को तोड़-मरोड़ कर अपने विचारों को आगे बढ़ाना है।
होसबाले ने कहा, “मैक्स मूलर ने हमें इस जगह (भारत) के बारे में बताया था। मुझे नहीं पता कि उन्होंने कितना अध्ययन किया था, लेकिन उन्हें एक उद्देश्य के साथ नियुक्त किया गया था।”
उन्होंने कहा, “एक विमर्श गढ़ना पड़ा। इसीलिए यह कहा गया कि ‘आर्य’ बाहर से (भारत) आए थे। चूंकि उन्होंने आर्य को बाहरी बना दिया, इसलिए द्रविड़ लोगों को दक्षिण की ओर धकेल दिया गया।”
उन्होंने कहा कि इस तरह की कथाएं देश में एक एजेंडा के तहत गढ़ी गईं।
उन्होंने कहा, “कहानियों का यह जाल, सच्चाई और इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का यह दुर्भावनापूर्ण प्रयास पिछले कई दशकों से इस देश में किया जा रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “मैकाले ने कहा था, ‘हमें एक ऐसा वर्ग बनाना होगा, जो हमारे और उन लाखों लोगों के बीच मध्यस्थ का काम करेगा जिन पर हम शासन करते हैं’।”
भाषा प्रशांत पवनेश
पवनेश

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