सीमित भूमि संसाधनों के कारण अंतिम संस्कार के वैज्ञानिक प्रबंधन की जरूरत : भाजपा सदस्य

सीमित भूमि संसाधनों के कारण अंतिम संस्कार के वैज्ञानिक प्रबंधन की जरूरत : भाजपा सदस्य

सीमित भूमि संसाधनों के कारण अंतिम संस्कार के वैज्ञानिक प्रबंधन की जरूरत : भाजपा सदस्य
Modified Date: March 17, 2026 / 01:34 pm IST
Published Date: March 17, 2026 1:34 pm IST

नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) सीमित भूमि संसाधनों के कारण अंतिम संस्कार के वैज्ञानिक प्रबंधन की जरूरत को रेखांकित करते हुए मंगलवार को राज्यसभा में भाजपा के अजित माधवराव गोपछड़े ने कहा कि सभी परंपराओं का सम्मान करते हुए इसके लिए एक नीति बनाई जानी चाहिए।

शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए गोपछड़े ने कहा कि हमारे देश में शहरीकरण बहुत तेज गति से हो रहा है और आबादी भी निरंतर बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भूमि एक बहुमूल्य संसाधन बन चुकी है इसलिए अंतिम संस्कार एवं दफन स्थलों का पारदर्शी एवं दीर्घकालिक प्रबंधन समय की मांग है ताकि भविष्य में भूमि उपयोग एवं नगर नियोजन संबंधी अनावश्यक विवादों से बचा जा सके।

गोपछड़े ने सुझाव दिया कि सभी श्मशान स्थलों एवं कब्रिस्तानों की अनिवार्य डिजिटल मैपिंग या जीएस मैपिंग की जाए जिससे इन स्थलों की भूमि का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।

उन्होंने कहा कि भूमि ऑडिट में जहां पुराने रिकॉर्ड एवं वास्तविक स्थिति में अंतर है वहां व्यापक भूमि ऑडिट किया जाए, आंकड़ों में सुधार कर रिकॉर्ड अद्यतन किया जाए और उसे सार्वजनिक भी किया जाए।

गोपछड़े ने कहा कि नवाचार एवं आधुनिक प्रणालियों के माध्यम से जापान और यूरोपीय देशों में ऊर्ध्वाधर कब्रिस्तानों का चलन एक उभरता हुआ समाधान है। इसके अलावा इन देशों ने गैस या विद्युत शवदाह गृहों जैसी आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल प्रणाली अपनाई है।

उन्होंने कहा कि सऊदी अरब में बिना मकबरे वाले सरल दफन की परंपरा एक मिसाल है और भारत में भी ऐसी पद्धतियां अपनाई जानी चाहिए।

गोपछड़े ने कहा ‘‘यह किसी एक धर्म की बात नहीं है बल्कि एक गंभीर मुद्दे के समाधान की बात है। सभी परंपराओं का सम्मान करते हुए हमें भविष्य के लिए भूमि बचानी चाहिए और सीमित भूमि संसाधनों में अंतिम संस्कार के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए एक नीति बनानी चाहिए।

भाषा मनीषा अविनाश

अविनाश


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