नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी 2026) प्रश्नपत्र लीक मामले की सुनवाई कर रही दिल्ली की एक अदालत ने हाल में कहा कि आरोप तय किए जाने के मुद्दे पर बहस को इस आधार पर टाला नहीं जा सकता कि मामले में आगे की जांच अभी लंबित है।
विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता एक आरोपी की उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें पूरक आरोपपत्र दाखिल होने तक आरोप तय करने पर बहस टालने का अनुरोध किया गया था।
आरोपी के वकील ने दलील दी कि लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 की धारा 12-ए के तहत मामला दर्ज होने के दो महीने बाद आगे जांच नहीं की जा सकती और मुकदमे की सुनवाई शुरू होने के बाद पूरक आरोपपत्र दाखिल नहीं किया जा सकता।
हाल में उपलब्ध कराए गए 18 सितंबर के आदेश में अदालत ने कहा कि धारा 12-ए में जांच पूरी करने के लिए तय दो महीने की समयसीमा जांच एजेंसी को निर्धारित अवधि के बाद जांच करने से नहीं रोकती।
अदालत ने कहा, ‘‘निर्धारित अवधि के भीतर जांच पूरी नहीं होने का एकमात्र परिणाम यह है कि आरोपी को वैधानिक जमानत का अधिकार मिल जाता है।’
अदालत ने कहा, ‘‘ऐसा कोई प्रावधान (अधिनियम में) नहीं है जो दो महीने की अवधि के बाद नियमित जांच जारी रखने और आगे जांच करने पर रोक लगाता हो।’
अदालत ने इस सवाल पर भी गौर किया कि क्या मुकदमे की सुनवाई शुरू होने से पहले आगे की जांच के संबंध में पूरक आरोपपत्र दाखिल करना अनिवार्य है।
अदालत ने 2009 के उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का हवाला दिया, जिसके अनुसार ‘‘आरोपपत्र दाखिल किए जाने के बाद भी आगे की जांच करना पुलिस का वैधानिक अधिकार है। (दूसरी ओर) पूर्व अनुमति के बिना पुन:जांच करना प्रतिबंधित है।’’
अदालत ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की नयी धारा 193(9) में विशेष रूप से प्रावधान किया गया है कि जांच एजेंसी मुकदमे की शुरुआत के बाद भी अदालत की अनुमति से आगे जांच कर सकती है।
बीएनएसएस की यह धारा पुलिस को शुरुआती आरोपपत्र दाखिल होने के बाद आगे जांच करने और पूरक रिपोर्ट पेश करने की अनुमति देती है।
अदालत ने कहा कि आरोपी के वकील ने यह मुद्दा भी उठाया था कि क्या आगे की जांच जारी रहने के दौरान आरोप तय किए जाने के मुद्दे पर बहस टाल दी जानी चाहिए।
अदालत ने रिकॉर्ड में मौजूद साक्ष्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि 13 आरोपियों के संबंध में जांच पूरी हो चुकी है और उनसे जुड़ी आगे जांच केवल केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) की रिपोर्ट मिलने तक बाकी है।
अदालत ने कहा, ‘‘यह भी स्पष्ट है कि आगे जांच अन्य साजिशकर्ताओं की भूमिका का पता लगाने के लिए की जा रही है। इसलिए प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि जहां तक इन 13 आरोपियों का संबंध है, उनके खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है। इसीलिए, इन परिस्थितियों में आरोपपत्र में नामजद इन सभी आरोपियों के मामले में आरोप तय करने के बिंदु पर दलीलें सुनने के लिए कार्यवाही आगे बढ़ाई गई।’’
अदालत ने स्पष्ट किया कि आगे की जांच के दौरान 13 आरोपियों के खिलाफ कोई नया अहम साक्ष्य सामने आता है, तो उन्हें पूरक आरोपपत्र की प्रति दी जाएगी। साथ ही, उन्हें उस सामग्री पर अपना पक्ष रखने का अतिरिक्त अवसर भी मिलेगा।
अदालत ने कहा कि मामले की फाइल करीब 20,000 पन्नों की है और लोक परीक्षा अधिनियम के तहत इस मामले की सुनवाई जल्द पूरी किया जाना जरूरी है। इसके मद्देनजर अदालत ने आरोप तय किए जाने के मुद्दे पर बहस जारी रखने का निर्देश दिया।
भाषा
शुभम खारी
खारी