NEET Paper Leak News / Image Credit : AI GENERATED
नई दिल्ली: NEET Paper Leak News देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET अब सिर्फ एक विवाद नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ‘मल्टी-स्टेट सिंडिकेट’ का शिकार होती नजर आ रही है। सीबीआई (CBI) की जांच में ऐसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने पूरे शिक्षा तंत्र की जड़ों को हिला दिया है। जांच के तार अब राजस्थान से लेकर हरियाणा, बिहार और केरल तक जुड़ रहे हैं।
जांच में सामने आया है कि पेपर का सर्कुलेशन सिर्फ WhatsApp तक सीमित नहीं था। CBI Investigation NEET 2026 इसे टेलीग्राम जैसे एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए फैलाया गया। कई मोबाइल फोन्स में Forwarded Many Times का टैग मिलना इस बात का सबूत है कि यह सामग्री जंगल की आग की तरह हजारों छात्रों तक पहुंच चुकी थी। SOG अब कॉल डिटेल्स और बैंक ट्रांजैक्शंस के जरिए इस ‘डिजिटल ट्रेल’ को डिकोड करने में जुटी है।
सूत्रों के मुताबिक, पेपर लीक का केंद्र कोई कोचिंग संस्थान नहीं, बल्कि सीधे प्रिंटिंग प्रेस या ट्रांसपोर्ट चेन हो सकती है। दावा किया जा रहा है कि पेपर सबसे पहले नासिक से निकला, फिर हरियाणा के रास्ते जयपुर और जमवारामगढ़ पहुंचा। इसके बाद सीकर को इसका मुख्य डिस्ट्रीब्यूशन हब बनाया गया, जहाँ से इसे बिहार, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड तक फैलाया गया।
कोटा के बाद देश के दूसरे बड़े कोचिंग हब सीकर में इस पेपर का सबसे ज्यादा प्रभाव देखा गया। छात्रों को गेस पेपर के नाम पर यह सामग्री परोसी गई। चौंकाने वाली बात यह है कि परीक्षा से पहले ही बायोलॉजी के सभी 90 और केमिस्ट्री के सभी 45 सवाल चुनिंदा लोगों के पास थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, करीब 140 सवाल असली परीक्षा से हूबहू मैच हुए हैं। यानी, पेपर खरीदने वाले छात्रों को सीधे 600 नंबर तक का फायदा मिल सकता था, जो किसी भी ‘गेस पेपर’ के लिए नामुमकिन है।
खुलासा हुआ है कि परीक्षा से पहले कुछ छात्रों को दिल्ली से फोन आए थे कि पेपर आ गया है। शुरुआत में यह सामग्री लाखों रुपये में बेची गई, लेकिन जैसे-जैसे परीक्षा नजदीक आई, छात्रों ने ही इसे 5 हजार से 30 हजार रुपये के कमीशन पर आगे बेचना शुरू कर दिया। इस खेल में हॉस्टल संचालक, MBBS काउंसलिंग से जुड़े लोग और कई कोचिंग संस्थानों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इस धांधली ने देशभर के 22 लाख छात्रों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। नागौर कनेक्शन में एक छात्र को 28 लाख रुपये में पेपर बेचने की बात ने सनसनी और बढ़ा दी है। अब सीबीआई उन सभी कड़ियों को जोड़ रही है जहाँ से पेपर प्रिंटिंग प्रेस से बाहर निकला। लाखों अभिभावकों और छात्रों में इस सिस्टम के प्रति भारी रोष है।
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