नयी दिल्ली, 19 सितंबर (भाषा) अंतरराष्ट्रीय स्तर के टेनिस खिलाड़ी, बास्केटबॉल खिलाड़ी और अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैंडबॉल खिलाड़ी उन नए चेहरों में शामिल हैं, जो दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के तीन केंद्रीय पदों पर एबीवीपी का प्रतिनिधित्व करेंगे।
उपाध्यक्ष पद पर एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल की है, जो बस कंडक्टर के बेटे हैं और एनएसयूआई से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने बड़ा दांव खेला।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), कांग्रेस समर्थित भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) और आइसा-एसएफआई गठबंधन के बीच कड़े मुकाबले के बाद शनिवार को डूसू चुनाव के नतीजे घोषित किए गए। निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में थे।
दिल्ली के कंझावला निवासी एबीवीपी के यश डबास ने 24,576 वोट हासिल कर डूसू अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की।
डबास अंतरराष्ट्रीय स्तर के टेनिस खिलाड़ी हैं। उन्होंने श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है और वर्तमान में बौद्ध अध्ययन विभाग में अध्ययनरत हैं।
डबास स्पेन, ऑस्ट्रेलिया और सर्बिया में अंतरराष्ट्रीय टेनिस महासंघ (आईटीएफ) की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। उनका चयन 2023 में सीबीएसई नेशनल्स, एसजीएफआई नेशनल्स, खेलो इंडिया और अखिल भारतीय विश्वविद्यालय खेलों के लिए भी हुआ था।
एबीवीपी की रिया छाबड़ी ने 21,650 वोट हासिल कर सचिव पद जीता। वह दिल्ली के बदरपुर स्थित मोड़बंद गांव की रहने वाली हैं और किसान परिवार से आती हैं।
छाबड़ी अंतर कॉलेज स्तर की बास्केटबॉल खिलाड़ी हैं और वर्तमान में श्री अरबिंदो कॉलेज में चार वर्षीय बीए पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष में हैं।
एबीवीपी के टिकट पर 16,615 वोट हासिल कर संयुक्त सचिव चुने गए लक्ष्य राज सिंह राजस्थान के चूरू जिले के रहने वाले हैं।
सिंह ने श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक किया है। सिंह अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैंडबॉल खिलाड़ी हैं और उन्होंने एशियाई खेलों तथा विश्व चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने राष्ट्रीय खेलों में राजस्थान और राष्ट्रीय विश्वविद्यालय खेलों में दिल्ली विश्वविद्यालय का भी प्रतिनिधित्व किया है।
वर्तमान में वह दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय के कैंपस लॉ सेंटर में कानून की पढ़ाई कर रहे हैं।
एनएसयूआई द्वारा समर्थन नहीं दिए जाने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट हासिल कर उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की।
वह दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के बस कंडक्टर और आंगनवाड़ी शिक्षिका के बेटे हैं तथा पश्चिमी दिल्ली के पीरागढ़ी गांव के रहने वाले हैं। बौद्ध अध्ययन विभाग के छात्र शौकीन ने भगत सिंह कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है।
शौकीन ने कहा है कि पिछले चार वर्षों में छात्र के रूप में मिले अनुभवों ने उन्हें छात्र राजनीति में आने का फैसला करने के लिए प्रेरित किया।
शौकीन ने दावा किया कि सत्य निकेतन इमारत गिरने की घटना के बाद उन्होंने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नंगे पैर चलना जारी रखा। इस हादसे में दिल्ली विश्वविद्यालय के पांच छात्रों समेत सात लोगों की मौत हुई थी।
शौकीन ने संकल्प लिया है कि जब तक हादसे से प्रभावित छात्रों को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक वह जूते नहीं पहनेंगे।
नवनिर्वाचित डूसू उपाध्यक्ष ने कहा कि उनके चुनाव अभियान का मुख्य केंद्र उन छात्र मुद्दों को उठाना था, जिनका उन्होंने खुद सामना किया है।
शौकीन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘चाहे वह छात्रावास की सुविधा का मुद्दा हो, विश्वविद्यालय का बुनियादी ढांचा हो या नीतियां, मैंने इन सभी समस्याओं का खुद सामना किया है। यह चुनाव छात्रों से जुड़े इन्हीं मुद्दों पर लड़ा गया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘चुनाव लड़ना मेरा एकमात्र उद्देश्य नहीं था। मैं सभी छात्रों और उनके मुद्दों का प्रतिनिधित्व कर रहा था। मैं उनकी आवाज उठाने के लिए यहां हूं।’’
शौकीन ने सार्वजनिक रूप से एनएसयूआई में ‘‘संगठनात्मक कमियों’’ की आलोचना की है और उम्मीदवारों के चयन के तरीके पर सवाल उठाए हैं।
नतीजे घोषित होने के दिन ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में शौकीन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों का धन्यवाद किया। उन्होंने लिखा, ‘‘यह जीत मेरी नहीं है। यह हर उस छात्र की जीत है जो परिसर में वास्तविक मुद्दे उठाना चाहता है। निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ना आसान नहीं था, लेकिन आपने साबित कर दिया कि छात्रों का भरोसा छात्र संगठनों से ऊपर होता है।’’
शौकीन ने उपाध्यक्ष पद के लिए अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी एबीवीपी के ईशु मौर्य को 13,705 मतों के अंतर से हराया।
भाषा शोभना शफीक
शफीक