नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश भूजल विभाग से नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से भूजल दोहन की शिकायत पर विचार करने और उचित कार्रवाई के लिए कहा है।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ता विक्रांत तोंगड द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याचिका में आरोप लगाया गया कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में निजी बिल्डर, उद्योग और कुछ व्यक्ति अवैध रूप से भूजल का दोहन कर रहे हैं।
विशेष रूप से नोएडा के सेक्टर 145 और 153 तथा ग्रेटर नोएडा के टेक ज़ोन क्षेत्र के सेक्टर 94 और 150 में बड़े पैमाने पर अवैध भूजल निकासी की जा रही है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने कहा, ‘‘हम अवैध भूजल दोहन को रोकने के लिए कार्रवाई की मांग करते हुए लगातार केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) और अन्य संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।’’
हालिया आदेश में एनजीटी ने कहा कि प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता को सक्षम प्राधिकार के समक्ष उचित शिकायत दर्ज करानी चाहिए, और इस मामले में सक्षम प्राधिकार उत्तर प्रदेश भूजल विभाग है।
एनजीटी ने कहा, ‘‘इसलिए हम मूल आवेदन का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ता को यह अनुमति देते हैं कि वह प्रतिवादी संख्या-7, अर्थात उत्तर प्रदेश भूजल विभाग, के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष सभी सहायक दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ विस्तृत शिकायत प्रस्तुत करे।
आदेश में कहा गया, ‘‘शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित प्राधिकार कानून के अनुसार उसकी जांच करेगा, मौके पर सत्यापन कराएगा और यदि कोई ट्यूबवेल या बोरवेल अवैध रूप से संचालित पाया जाता है, तो कानून के अनुरूप उचित सुधारात्मक तथा दंडात्मक कार्रवाई करेगा।’’
भाषा आशीष संतोष
संतोष