एनजीटी ने यमुना नदी में अशोधित सीवेज छोड़े के मुद्दे पर उप्र मुख्य सचिव से गौर करने को कहा

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एनजीटी ने यमुना नदी में अशोधित सीवेज छोड़े के मुद्दे पर उप्र मुख्य सचिव से गौर करने को कहा

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  • Publish Date - May 21, 2021 / 01:22 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:01 PM IST

नयी दिल्ली 21 मई (भाषा) राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को यमुना नदी तथा कोसी नाले में वृंदावन और कोसी से अशोधित सीवेज एवं अपशिष्ट जल के छोड़े जाने का आरोप लगाने वाली याचिका पर गौर करने का निर्देश दिया है।

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव से कहा कि वह अन्य अधिकारियों की मदद से यह सुनिश्चित करें कि अशोधित सीवेज और अपशिष्ट जल यमुना नदी में नहीं छोड़ा जाए।

इसे अलावा एनजीटी ने सीवेज शोधन की क्षमता, नदी किनारे के मैदानों की हरियाली तथा सीमांकन करने के अलावा वहां से अतिक्रमण हटाने और घाटों का रखरखाव की ओर भी ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।

एनजीटी ने अपने आदेश में कहा, ‘ हम उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को आदेश देते हैं कि वह संबंधित अधिकारियों की सहायता से इस मामले पर गौर करे और साथ ही प्राधिकरण के आदेश के साथ-साथ उच्चतम न्यायालय के फैसले में दिए गए निर्देशों के अनुसार इस दिशा में की गयी कार्रवाई की भी समीक्षा करें।’

एनजीटी आचार्य दामोदर शास्त्री एवं अन्य लोगों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में उत्तर प्रदेश के अधिकारियों पर आरोप लगाया गया है कि वे यमुना नदी और कोसी नाले में वृंदावन से छोड़े जा रहे अशोधित सीवेज और गंदे पानी को रोकने में असफल रहे हैं।

भाषा रवि कांत माधव

माधव