नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने हरियाणा के अधिकारियों को उस निजी खनन कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है, जिसने अरावली के संरक्षित वन क्षेत्र में अवैध रूप से सड़क बनाई थी।
एनजीटी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोप लगाया गया कि ‘मैसर्स मां संतोषी खनिज उद्योग’ को 2020 में राज्य के महेंद्रगढ़ जिले की नारनौल तहसील के मुसनोटा गांव में खनन कार्य के लिए पर्यावरणीय मंजूरी मिली थी, लेकिन नियमों का उल्लंघन करते हुए उसने अपनी खदानों तक पहुंचने के लिए अवैध रूप से अस्थायी सड़क बना ली।
याचिका के अनुसार, खनिज ले जाने वाले भारी वाहन इस सड़क का इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे अरावली वनक्षेत्र को नुकसान हुआ और पर्यावरण नियमों का उल्लंघन किया गया।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने गौर किया कि एनजीटी ने पहले एक संयुक्त समिति बनाई थी, जिसने रिपोर्ट सौंपी थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्थायी सड़क अरावली वन क्षेत्र में स्थित थी और संबंधित कंपनी ने सड़क बनाने और इस्तेमाल करने से पहले वन (संरक्षण) अधिनियम के तहत जरूरी मंजूरी नहीं ली थी।
मंगलवार को उपलब्ध हुए 22 जुलाई के अपने आदेश में एनजीटी ने कहा कि अस्थायी सड़क पहले मौजूद नहीं थी, लेकिन इसे खनन कंपनी ने बनाया और इस्तेमाल किया। इसके अलावा, कंपनी ने अस्थायी सड़क बनाने और इस्तेमाल करने के लिए कभी आवश्यक मंजूरी नहीं ली।
भाषा शफीक माधव
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