एनजीटी को गुजरात में क्षतिपूर्ति के तौर पर पेड़ लगाने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश

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एनजीटी को गुजरात में क्षतिपूर्ति के तौर पर पेड़ लगाने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश

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  • Publish Date - January 27, 2026 / 10:00 PM IST,
    Updated On - January 27, 2026 / 10:00 PM IST

नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को एनजीटी की पुणे पीठ को अहमदाबाद के हंसोल में एक हेलीपैड के निर्माण और रिवरफ्रंट विकास परियोजना के लिए चार हजार पेड़ काटे जाने के मद्देनजर क्षतिपूर्ति के तौर पर किसी और जगह पेड़ लगाने के लिए उचित भूमि की पहचान करने को लेकर वन विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने का निर्देश दिया।

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति आर. महादेवन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने हालांकि स्थानीय निवासी फिरदौस कंबाटा के अनुरोध पर परियोजना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

पीठ ने कहा कि एनजीटी, पुणे द्वारा स्वीकार की गई एक विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के अनुसार हेलीपैड के निर्माण और रिवरफ्रंट विकास परियोजना के लिए गैर वन भूमि पर लगभग 4,000 पेड़ काटे गए हैं।

सीजेआई ने कहा कि विकास और पर्यावरण की देखभाल साथ-साथ की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि उक्त भूमि पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील भूमि नहीं है और न ही वह वन भूमि है।

सीजेआई ने हालांकि कहा कि क्षतिपूर्ति के तौर पर पेड़ लगाए जाने की जरूरत है और इसके लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को वन विभाग के अधिकारियों की सदस्यता वाली एक समिति गठित करने का निर्देश दिया जाता है।

भाषा

जोहेब अविनाश

अविनाश