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बारामती: महाराष्ट्र के बारामती में बुधवार को एक भयानक विमान हादसा हुआ, जिसमें महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, अजित पवार जिला परिषद चुनावों के लिए जनसभा में शामिल होने बारामती जा रहे थे। यह विमान मुंबई से बारामती जा रहा था और चार्टर्ड बिजनेस जेट था। दुख की बात यह है कि विमान में सवार सभी लोग इस दुर्घटना में अपनी जान गंवा चुके हैं।
हादसे के समय मौके पर मौजूद एक चश्मदीद ने बताया कि जब विमान रनवे पर उतर रहा था, तो नियंत्रण खो गया और विमान क्रैश हो गया। इसके बाद बड़े धमाके हुए और विमान में आग लग गई। चश्मदीद ने बताया, “मैंने यह अपनी आंखों से देखा। यह सच में बहुत दुखद है। जब विमान नीचे आ रहा था, तो ऐसा लगा कि यह क्रैश हो जाएगा, और यह क्रैश हो गया। फिर इसमें धमाका हुआ। बहुत बड़ा धमाका हुआ। उसके बाद, हम यहां भागे और देखा कि विमान में आग लगी हुई थी। विमान में फिर से 4-5 धमाके हुए। और लोग यहां आए, और उन्होंने लोगों को (विमान से) बाहर निकालने की कोशिश की। लेकिन क्योंकि यह बहुत बड़ी आग थी, इसलिए लोग मदद नहीं कर पाए। अजित पवार विमान में सवार थे और यह हमारे लिए बहुत दुखद है। मैं इसे शब्दों में बयान नहीं कर सकता।”
#WATCH | Crash landing in Baramati | Baramati, Maharashtra: An eyewitness at the spot says, “I saw it with my eyes. This is really painful. When the aircraft descended, it seemed it would crash, and it did crash. It then exploded. There was a massive explosion. After that, we… pic.twitter.com/fBQplnxHON
— ANI (@ANI) January 28, 2026
अजित पवार जिस विमान में सवार थे वह Learjet 45 मॉडल का बिजनेस जेट था, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर VT-SSK है। विमान का संचालन VSR Ventures Pvt Ltd द्वारा किया जा रहा था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विमान लैंडिंग के दौरान रनवे से उतर गया और चट्टान से टकरा कर क्रैश हो गया। विमान में आग लगने के कारण कोई भी यात्री सुरक्षित नहीं बच पाया।
अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा गांव में हुआ। उनके पिता अनंतराव पवार मुंबई के प्रसिद्ध राजकमल स्टूडियो में काम करते थे। पिता की असामयिक मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारियां अजित पवार पर आ गईं। इस कठिन दौर में उन्होंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी और परिवार का सहारा बनकर जीवन की चुनौतियों का सामना किया।
राजनीति में कदम रखते ही उन्होंने तेजी से अपने पद का दायरा बढ़ाया। 1982 में मात्र 23 वर्ष की उम्र में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया। महाराष्ट्र की राजनीति में उनका नाम एक सशक्त और प्रभावशाली नेता के रूप में रहा। वह शरद पवार के परिवार से जुड़े और एनसीपी में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते थे।
अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र की राजनीति में गहरा शोक छा गया है। बारामती और उसके आसपास के क्षेत्रों में लोग इस हादसे के बाद स्तब्ध हैं। जिला परिषद चुनावों और अन्य कार्यक्रमों पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ा है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अब उनके योगदान को याद किया जा रहा है।