उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान में दूषित पेयजल के मामले में एनजीटी का सीपीसीबी, अन्य को नोटिस

उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान में दूषित पेयजल के मामले में एनजीटी का सीपीसीबी, अन्य को नोटिस

  •  
  • Publish Date - January 14, 2026 / 08:44 PM IST,
    Updated On - January 14, 2026 / 08:44 PM IST

नयी दिल्ली, 14 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के कई शहरों में निवासियों को दूषित जल की आपूर्ति किए जाने से जुड़ी मीडिया की खबरों पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और अन्य से जवाब मांगा है।

अधिकरण ने दूषित जल की कथित आपूर्ति के संबंध में दो समाचार पत्रों की खबरों का स्वतः संज्ञान लिया।

अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने कहा कि एक खबर में गंभीर स्वास्थ्य जोखिम को रेखांकित किया गया है क्योंकि कथित तौर पर उदयपुर, जोधपुर, कोटा, बांसवाड़ा, जयपुर और अजमेर सहित राजस्थान के कई शहरों में दशकों पुराने और जंग लगी पाइपलाइन के कारण सीवेज का पानी पेयजल की पाइपलाइन में मिल गया था।

पीठ ने कहा कि खबर में राजस्थान के शहरों में इंदौर जैसी त्रासदी का दावा किया गया है। हाल में इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से फैले दस्त के कारण सात लोगों की मौत हो गई थी।

अध्यक्ष ने दूसरी खबर का भी संज्ञान लिया, जिसके अनुसार ग्रेटर नोएडा (सेक्टर डेल्टा 1) के कई निवासी दूषित पानी पीने के बाद उल्टी और दस्त जैसे लक्षणों के साथ बीमार पड़ गए थे।

इसी खबर में यह भी आरोप लगाया गया है कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के कुछ हिस्सों में पेयजल में ई. कोलाई बैक्टीरिया पाया गया है, जिसका कारण ट्यूबवेल में सीवेज का रिसाव है।

अधिकरण ने कहा, ‘‘उठाए गए मुद्दे गंभीर पर्यावरणीय और जन स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं पैदा करते हैं और प्रथम दृष्टया पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम और जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम के उल्लंघन का संकेत देते हैं।’’

अधिकरण ने सीपीसीबी, राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारों, उनके संबंधित प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालयों से जवाब मांगा है।

भाषा सुभाष नरेश

नरेश