एनजीटी ने अवैध खनन के आरोपों की जांच को लेकर झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फटकार लगाई

एनजीटी ने अवैध खनन के आरोपों की जांच को लेकर झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फटकार लगाई

एनजीटी ने अवैध खनन के आरोपों की जांच को लेकर झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फटकार लगाई
Modified Date: July 31, 2026 / 06:41 pm IST
Published Date: July 31, 2026 6:41 pm IST

रांची, 31 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने झारखंड के साहिबगंज जिले में अवैध खनन के आरोपों की जांच के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तरीके पर चिंता जताई और निरीक्षण करने में हुई देरी को लेकर सवाल उठाया। शुक्रवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई।

बयान के मुताबिक, एनजीटी की पूर्वी जोन पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि 17 जुलाई को संयुक्त समिति की ओर से किए गए निरीक्षण पर आधारित बोर्ड के जवाबी हलफनामे में अवैध खनन और जेसीबी मशीनों व ट्रैक्टर के इस्तेमाल के आरोपों को खारिज किया गया है।

बयान में कहा गया, “एनजीटी की पूर्वी जोन पीठ ने साहिबगंज में अवैध खनन के आरोपों की जांच के बोर्ड के तरीके पर चिंता जताई। अधिकरण ने सवाल किया कि 18 मई 2026 को नोटिस जारी होने के तुरंत बाद और मानसून शुरू होने से पहले निरीक्षण क्यों नहीं किया गया।”

पीठ ने कहा कि जवाबी हलफनामे में संबंधित अ‍वधि के दौरान अवैध खनन के आरोपों का सही तरीके से जवाब नहीं दिया गया और ऐसा लगता है कि इससे यह गलत धारणा बनाने की कोशिश की गई कि कोई अवैध खनन हुआ ही नहीं।

पीठ ने कहा कि रिपोर्ट में मुख्य रूप से इस बात को आधार बनाया गया कि जिस क्षेत्र में कथित रूप से खनन किया गया, वह पानी से भर गया था।

पीठ ने कहा कि इसमें मूल शिकायतों या अन्य महत्वपूर्ण सबूतों की जांच नहीं की गई।

अधिकरण ने बोर्ड को निर्देश दिया कि वह एक अतिरिक्त जवाब दाखिल करे, जिसमें मूल याचिका में बताए गए समय के दौरान हुए अवैध खनन के आरोपों पर विशेष रूप से जानकारी दी जाए।

बयान में बताया गया, “अधिकरण ने साहिबगंज के जिलाधिकारी/उपायुक्त को भी चार हफ्ते का समय दिया, ताकि वे खनन गतिविधियों से जुड़े रिकॉर्ड और अवैध खनन रोकने के लिए जिला कार्य बल की ओर से उठाए गए कदमों के साथ एक विस्तृत जवाब दाखिल कर सकें।”

अधिकरण ने चेतावनी दी कि अगर तय समय के भीतर जवाब दाखिल नहीं किया गया, तो जिलाधिकारी/उपायुक्त को पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर फैसला करने में मदद के लिए अधिकरण के सामने व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पेश होना होगा।

मामले की अगली सुनवाई तीन सितंबर को निर्धारित की गई है।

भाषा जितेंद्र पारुल

पारुल


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