मुर्शिदाबाद हिंसा मामले में यूएपीए पर उच्च न्यायालय में रिपोर्ट दाखिल करे एनआईए: शीर्ष अदालत

मुर्शिदाबाद हिंसा मामले में यूएपीए पर उच्च न्यायालय में रिपोर्ट दाखिल करे एनआईए: शीर्ष अदालत

मुर्शिदाबाद हिंसा मामले में यूएपीए पर उच्च न्यायालय में रिपोर्ट दाखिल करे एनआईए: शीर्ष अदालत
Modified Date: February 11, 2026 / 09:41 pm IST
Published Date: February 11, 2026 9:41 pm IST

नयी दिल्ली, 11 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को निर्देश दिया कि वह पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में हुई हिंसा और अशांति से संबंधित एक मामले में आतंकवाद से जुड़े कठोर प्रावधानों वाले गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के इस्तेमाल का औचित्य स्पष्ट करते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय में सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट दाखिल करे।

पश्चिम बंगाल सरकार की अपील का निस्तारण करते हुए प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राज्य सरकार को मुर्शिदाबाद हिंसा मामले में एनआईए की जांच के खिलाफ अपनी शिकायतों के साथ कलकत्ता उच्च न्यायालय में जाने के लिए भी कहा।

शीर्ष अदालत ने कहा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय इस मामले में एनआईए जांच का आदेश देने के केंद्र के फैसले को राज्य सरकार द्वारा दी गई चुनौती की भी पड़ताल कर सकता है।

सुनवाई के दौरान, पीठ ने एनआईए से पूछा कि मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में हुई हिंसा की जांच को उचित ठहराने के लिए गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (यूएपीए) के प्रावधानों को लागू करने का आधार क्या था।

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 28 जनवरी को एनआईए को इस मामले की जांच सौंपी गई थी। एनआईए ने मामले में यूएपीए की धारा 15 (1) (ए) लागू की।

यह प्रावधान आतंकी कृत्यों से संबंधित है, जो किसी भी ऐसे व्यक्ति पर लगाया जा सकता है जो भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा या संप्रभुता को खतरे में डालने के इरादे से या आतंक फैलाने के इरादे से कोई भी कार्य करता है।

पीठ ने एनआईए को इस संबंध में कलकत्ता उच्च न्यायालय में सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

इसने यह भी कहा कि एनआईए ने यह निष्कर्ष निकाला कि इस मामले में यूएपीए के प्रावधान लागू होते हैं, जबकि राज्य पुलिस ने एनआईए को केस डायरी या संबंधित दस्तावेज नहीं सौंपे हैं।

शीर्ष अदालत की पीठ ने कहा, ‘‘ दस्तावेजों को देखे बिना ही आपने कहा है कि यूएपीए की धारा 15 उचित है। केस डायरी आपके सामने पेश नहीं की गई… यह एक पूर्व-निर्णय है। हर भावनात्मक आवेश को आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा नहीं माना जा सकता।’’

पड़ोसी राज्यों में प्रवासी श्रमिकों पर कथित हमलों के संबंध में मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में हुई हिंसा के मद्देनजर वहां केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग करते हुए उच्च न्यायालय में दो जनहित याचिकाएं दायर की गईं।

प्रदर्शनकारियों ने 16 जनवरी को झारखंड में प्रवासी मजदूर के रूप में काम करने वाले बेलडांगा निवासी की मौत के विरोध में राष्ट्रीय राजमार्ग-12 को अवरुद्ध कर दिया था। बिहार में प्रवासी मजदूर के रूप में काम करने वाले मुर्शिदाबाद निवासी एक व्यक्ति के साथ कथित तौर पर बदसलूकी के विरोध में भी 17 जनवरी की सुबह इसी तरह के प्रदर्शन हुए थे।

भाषा रवि कांत नेत्रपाल

नेत्रपाल


लेखक के बारे में