#NindakNiyre: 16-17 जनवरी की बैठक के बाद भाजपा हो जाएगी पूरी नई, विश्लेषण

#NindakNiyre: 16-17 जनवरी को होगी भाजपा की बैठक, तय होंगे 2023 के नेता, मुद्दे, संसाधन, बिछेगी 2024 की बिसात, संपूर्ण राजनीतिक विश्लेषण.. यहां पढ़िए

इस चर्चा में तीन स्तरों पर बात होगी। पहली सांगठनिक उधेड़बुन, दूसरा सत्ता सरकार की रणनीति, तीसरा मुद्दे। 16-17 जनवरी की इस बैठक में किस-किस बात पर चर्चा होगी, आइए समझते हैं जरा विस्तार से।

Edited By: , January 13, 2023 / 07:13 PM IST

बरुण सखाजी. सह-कार्यकारी संपादक-आईबीसी24

भाजपा की 16-17 जनवरी को राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक होने जा रही है। इस बैठक में 2023 में होने वाले 9 राज्यों के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव प्रमुख रूप से एजेंडे में शामिल हैं। इसके अलावा पार्टी अपने कुछ प्रदेश के अध्यक्षों को भी बदल सकती है। चर्चा तो यहां तक है कि कुछ मुख्यमंत्रियों की भी छुट्टी हो सकती है। राष्ट्रीय अध्यक्ष फिलहाल जेपी नड्डा हैं, लेकिन चर्चा दूसरे नामों पर भी होगी। इस चर्चा में तीन स्तरों पर बात होगी। पहली सांगठनिक उधेड़बुन, दूसरा सत्ता सरकार की रणनीति, तीसरा मुद्दे। 16-17 जनवरी की इस बैठक में किस-किस बात पर चर्चा होगी, आइए समझते हैं जरा विस्तार से।

संगठन में बदलाव, क्या 42 फीसद विजय प्रदर्शन वाले नड्डा को मिलेगा विस्तार?

पार्टी इस बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को कार्यकाल विस्तार दे सकती है। इसकी संभावनाएं सबसे ज्यादा हैं। लेकिन इसके दूसरा पक्ष यह भी है कि संघ और भाजपा में कुछ नामों को लेकर असहमति है। इस पर भी चर्चा होगी। नड्डा का कार्यकाल विस्तार हो सकता है, परंतु अगर नहीं होता तो बीएल संतोष, सीआर पाटिल ऐसे नाम हैं जिन्हें पार्टी कमान दे सकती है। नड्डा के नेतृत्व में 14 राज्यों में चुनाव हुए हैं, जिनमें से भाजपा 7 ही जीते थे, लेकिन बाद में एमपी और महाराष्ट्र की पलटी मिलाकर यह संख्या 9 हो जाती है। यानि विक्ट्री रेट 50 परसेंट, सत्ता में वापसी का रेट 65 परसेंट रहा। गठबंधन के पैमाने पर देखें तो बिहार जैसा राज्य हाथ से फिसला भी है। नड्डा के कार्यकाल में राज्यसभा के 81 चुनाव हुए में भाजपा अपनी 32 सीटों में से 30 ही बहाल रख पाई। यानि लगभग 40 फीसद विक्ट्री रेट। देश में 122 विधानसभा के उपचुनाव में से पार्टी 60 प्लस सीटों पर जीत पाई। यानि 50-55 फीसद विक्ट्री रेट। जबकि 8 लोकसभा उपचुनाव में नड्डा सिर्फ 2 सीटें ही जीत पाए। यह महज 25 फीसद विक्ट्री रेट है। अगर इस तरह से देखें तो नड्डा का एवरेज विक्ट्री रेट 42 फीसद लगभग है।

एमपी वीडी की जगह आदिवासी चेहरे पर विचार

भाजपा अपने 9 राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों पर विचार कर सकती है। इनमें सबसे अहम है मध्यप्रदेश। एमपी में चल रही सत्ता-संगठन के बीच की तकरार से पार्टी नहीं चाहती कि लोकसभा से महज 3 महीने पहले 29 सीटों वाला मजबूत भाजपाई राज्य उसके हाथ से छिटके। पार्टी को इसका समाधान प्रदेश भाजपा में व्यापक बदलाव ही लग रहा है। ऐसे ही गुजरात के प्रदेश अध्यक्ष को राष्ट्रीय टीम में लेने की चर्चा है। एमपी में वीडी शर्मा वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष हैं, उनके स्थान पर अनुसूचित जनजाति समाज से आने वाले राष्ट्रीय जनजाति आयोग के अध्यक्ष हर्ष चौहान का नाम सबसे आगे है। इनके अलावा सुमेर सिंह सोलंकी का नाम भी पैनल में रखा गया है। वहीं फग्गन सिंह कुलस्ते का नाम भी इस पैनल में रखा गया है।

मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल पर बात

एमपी समेत अन्य भाजपा शासित राज्यों में मंत्रिमंडल में खाली सीटों पर तय किए गए पैनल में से मंत्रियों के लिए चयन। इनमें सबसे ज्यादा एमपी पर चर्चा होगी। चूंकि 2023 में सबसे बड़ा चुनावी राज्य एमपी ही है। कर्नाटक की आपसी टशन को झेल रहे मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई का रास्ता भी साफ किया जा सकता है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल पर बातचीत

इस दौरान केंद्रीय मंत्रिमंडल पुनर्गठन पर भी चर्चा होगी। इसमें सबसे खास बात यह है कि एमपी, सीजी से प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा इस बात की समीक्षा भी होगी कि मौजूदा मंत्रियों ने अपने-अपने राज्यों में क्या किया। इस मंत्रिमंडल में नए-पुराने का गठजोड़ बनाने की कोशिश रहेगी। छत्तीसगढ़ से भाजपा के एससी नेता व जांजगीर सांसद गुहाराम अजगले मंत्री बनाए जा सकते हैं। इनके अलावा सरोज पांडेय, विजय बघेल भी इस दौड़ में शामिल हैं।

सरकारों की रणनीति

इसे लेकर राज्य और केंद्र की सरकार की चुनावी रणनीति पर चर्चा होगी। मध्यप्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में भी चुनाव हैं। इनमें से एमपी और कर्नाटक भाजपा के पास है। पार्टी का फोकस है कि यह दोनों रही राज्य की सरकारें चुनावी रणनीति पर क्या काम कर रही हैं, इसका रिव्यू हो।

मुद्दों पर बात

इस दौरान मुद्दों को लेकर भी बात होगी। 2024 के आम चुनाव के लिए सहेजकर रखे गए राममंदिर, धारा 370, ट्रिपल तलाक जैसे मसलों का भाजपा 2023 में लिटमस टेस्ट करना चाहती है। इन मुद्दों के जरिए आम चुनाव तो जीते जा सकते हैं, लेकिन क्या ये राज्यों में आम चुनाव से ऐन पहले मुद्दा बन पाएंगे। पार्टी इन बड़े मसलों के अलावा किसान, ओल्ड पेंशन स्कीम, फ्री राशन और अन्य सामान को लेकर पार्टी का स्टैंड तय करना चाहती है। चूंकि ओल्ड पेंशन जमीनी स्तर पर चुनावी फायदे का सौदा बनता जा रहा है। ऐसे में भाजपा नहीं चाहती कि वह कर्मचारी वोटर्स, परिजन और उनके प्रभाव वाले लोगों के वोट छोड़े। यह किसी भी राज्य में इतने जरूर हैं जो चुनावी उलटफेर कर सकते हैं। पार्टी इस दौरान आरक्षण जैसे मुद्दे पर भी स्पष्टता से बात करेगी। चूंकि विभिन्न राज्यों में आरक्षण बड़ा मुद्दा है। एमपी में हाल ही में करणी सेना का प्रदर्शन 2018 में सपाक्स के जरिए हुए माइके लाल प्रदर्शन की याद दिला रहा है। माइके लाल कैंपेन ने भाजपा को 109 पर रोक दिया था।

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