नीति आयोग की टीम ने बाढ़ के असर का जायजा लेने के लिए अरुणाचल का दौरा किया
नीति आयोग की टीम ने बाढ़ के असर का जायजा लेने के लिए अरुणाचल का दौरा किया
ईटानगर, 16 जुलाई (भाषा) नीति आयोग का एक उच्चस्तरीय दल हाल में आई बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने और आपदा से निपटने की क्षमता को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा के लिए बृहस्पतिवार को अरुणाचल प्रदेश पहुंचा।
अधिकारियों ने बताया कि राज्य में बाढ़ से अब तक एक लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने बताया कि नीति आयोग के सदस्य डॉ. जोराम अनिया के नेतृत्व वाले इस दल में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की सदस्य रीता मिसाल तथा नीति आयोग, एनडीएमए और केंद्रीय जल आयोग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, लगातार हो रही बारिश के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन से अब तक राज्य में सात लोगों की मौत हो चुकी है, 29 लोग घायल हुए हैं और 1,03,167 लोग प्रभावित हुए हैं। इस आपदा से बुनियादी ढांचे, मकानों, कृषि और बागवानी क्षेत्र को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि बैठक में राज्य में बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए आपदा से निपटने की क्षमता को मजबूत करने तथा अरुणाचल प्रदेश की विकास संबंधी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
उन्होंने दौरे पर आए प्रतिनिधिमंडल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस यात्रा से नीति-निर्माताओं को सीमावर्ती राज्य के लोगों के सामने मौजूद चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
खांडू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘हालिया बाढ़ के बाद हमारे लोगों के सामने मौजूद चुनौतियों को प्रत्यक्ष रूप से समझने के लिए अरुणाचल प्रदेश आने पर मैं प्रतिनिधिमंडल का आभार व्यक्त करता हूं।’
उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर किए जाने वाले ऐसे दौरे प्रभावी नीतियां और सहायता तंत्र तैयार करने के लिए आवश्यक हैं, ताकि वे वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप हों।
खांडू ने कहा, ‘जमीनी स्तर पर इस तरह का आकलन, ऐसी नीतियां और सहायता व्यवस्था तैयार करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जो राज्य की विशिष्ट आवश्यकताओं को सही मायने में पूरा कर सके।’
मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन के लिए क्षेत्र-विशिष्ट दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि अरुणाचल प्रदेश की भौगोलिक और जलवायु संबंधी परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए राज्य के लिए विशेष समाधान तैयार किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘अरुणाचल प्रदेश में आपदा प्रबंधन की रणनीति हमारे भू-भाग, जलवायु और यहां के लोगों की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप होनी चाहिए, न कि सभी राज्यों पर समान रूप से लागू होने वाली नीतियों के आधार पर होनी चाहिए।’
आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में बाढ़ से प्रभावित लोगों की कुल संख्या बढ़कर 1,03,167 हो गई है। इनमें अपर सियांग सबसे अधिक प्रभावित जिला है, जहां 49,259 लोग प्रभावित हुए हैं। इसके बाद सियांग (25,365), क्रा दादी (13,731), ईस्ट कामेंग (6,146), अपर सुबनसिरी (3,467) और नमसाई (2,657) का स्थान है।
राज्यभर में बाढ़ और भूस्खलन से 622 मकानों को नुकसान पहुंचा है। इनमें 454 कच्चे मकान, 100 पक्के मकान, 44 झोपड़ियां और अन्य श्रेणी के 24 मकान शामिल हैं।
कृषि और बागवानी क्षेत्र में भी नुकसान बढ़कर 561.75 हेक्टेयर तक पहुंच गया है जिसमें 224 हेक्टेयर कृषि भूमि और 337.75 हेक्टेयर बागवानी क्षेत्र शामिल है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच घनिष्ठ समन्वय तथा केंद्रीय एजेंसियों द्वारा किए गए प्रत्यक्ष आकलन से आपदा से निपटने की तैयारी मजबूत होगी, राज्य की क्षमता बढ़ेगी और सहायता संबंधी उपाय राज्य की विशेष आवश्यकताओं के अनुरूप सुनिश्चित किए जा सकेंगे।
भाषा
राखी नरेश
नरेश

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