विस्थापित कश्मीरियों की कोई भी भूमि उचित प्रक्रिया के बिना अधिग्रहित नहीं की गई: सरकार

विस्थापित कश्मीरियों की कोई भी भूमि उचित प्रक्रिया के बिना अधिग्रहित नहीं की गई: सरकार

विस्थापित कश्मीरियों की कोई भी भूमि उचित प्रक्रिया के बिना अधिग्रहित नहीं की गई: सरकार
Modified Date: February 17, 2026 / 05:00 pm IST
Published Date: February 17, 2026 5:00 pm IST

जम्मू, 17 फरवरी (भाषा) जम्मू कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने मंगलवार को कहा कि विस्थापित कश्मीरियों की कोई भी जमीन निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन करते हुए घाटी में अधिग्रहित नहीं की गई है।

उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) ने विस्थापित समुदाय के लिए न्याय सुनिश्चित करने के वास्ते लगातार काम किया है।

विधानसभा में, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) विधायक एम वाई तारिगामी द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘कश्मीर के संभागीय आयुक्त द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व सूचना देने और सत्यापन सहित निर्धारित भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं का पालन किए बिना कोई भी भूमि अधिग्रहित नहीं की जाती है तथा ऐसे सभी अधिग्रहण का आकलन लागू भूमि अधिग्रहण कानूनों के अनुसार किया जाता है।’’

चौधरी ने आपदा प्रबंधन, राहत, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण विभाग के प्रभारी, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से यह बात कही।

घाटी में कार्यरत कश्मीरी पंडित समुदाय के लगभग 6,000 कर्मचारियों के लिए प्रधानमंत्री के विशेष पैकेज के तहत जून 2022 में जारी एक अलग आदेश को अधिसूचित किये जाने के बारे में उपमुख्यमंत्री ने कहा था कि यह आदेश उन्हें सशक्त और संरक्षित करता है।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कश्मीरी प्रवासियों की भर्ती और प्रारंभिक नियुक्ति जम्मू कश्मीर प्रवासी (विशेष अभियान) भर्ती नियम, 2009 और 2009 और 2017 में स्वीकृत 6,000 अतिरिक्त पदों के सृजन द्वारा नियंत्रित होती है। ये आदेश मुख्य रूप से नौकरी शुरू करने और पदों की उपलब्धता से संबंधित हैं।’’

हालांकि, उन्होंने कहा कि इस पैकेज के तहत बड़े पैमाने पर नियुक्तियों के बाद, एक स्पष्ट सेवा-प्रबंधन ढांचा तैयार करने की आवश्यकता महसूस हुई।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने जून 2022 में एक आदेश जारी कर प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कर्मचारियों की वरिष्ठता, कैडर प्रबंधन, पदस्थापन और करियर प्रगति को व्यवस्थित तरीके से विनियमित किया।

विस्थापित कश्मीरियों के अस्थायी पंजीकरण में देरी के संबंध में, उपमुख्यमंत्री ने कहा कि 12 जुलाई 2023 को प्रशासन ने निर्णय लिया कि घाटी में कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार को देखते हुए, सुरक्षा कारणों से नये पंजीकरण उचित नहीं हैं तथा अस्थायी पंजीकरण मामलों में कोई और विस्तार नहीं दिया जाएगा।

हालांकि, मई 2024 में इन परिवारों के पंजीकरण की जांच और अनुमोदन के लिए पुनर्गठित एक स्क्रीनिंग कमेटी ने कई बैठकें की हैं और सभी मामलों में अपनी सिफारिशें दी हैं।

उपमुख्यमंत्री ने मामले में किसी भी तरह की अनुचित देरी से इनकार करते हुए कहा, ‘‘1,263 मामलों में से केवल 75 मामलों में सीआईडी/जिलाधिकारी (डीएम) रिपोर्ट का इंतजार है और इन मामलों में फैसला भी सीआईडी/डीएम रिपोर्ट प्राप्त होने के तुरंत बाद किया जाएगा।’’

अपने पूरक प्रश्न में तारिगामी ने कहा कि 2022 का आदेश ‘‘अत्यधिक भेदभावपूर्ण’’ था, हालांकि उन्होंने इसके संशोधन के लिए सरकार की पहल का स्वागत किया।

उन्होंने सरकार से पेंशनभोगियों के लिए राहत की समीक्षा करने का भी आग्रह किया।

तारिगामी ने कहा कि प्रवास परिस्थितियों के कारण होता है, स्वैच्छिक नहीं, इसलिए सरकार को मानवीय आधार पर सभी मामलों की समीक्षा करनी चाहिए।

उन्होंने सवाल किया, ‘वास्तविक मामलों का निर्धारण करने में दो साल कैसे लग सकते हैं?’ उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रवासी वे लोग हैं जिन्हें अपना घर-बार छोड़ने के लिए विवश किया गया।

भाषा सुभाष माधव

माधव


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