किसी व्यक्ति को महज पूछताछ करने के लिए गिरफ्तार नहीं किया जा सकता: उच्चतम न्यायालय

Ads

किसी व्यक्ति को महज पूछताछ करने के लिए गिरफ्तार नहीं किया जा सकता: उच्चतम न्यायालय

  •  
  • Publish Date - February 6, 2026 / 06:19 PM IST,
    Updated On - February 6, 2026 / 06:19 PM IST

नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि किसी व्यक्ति को महज पूछताछ करने के लिए गिरफ्तार नहीं किया जा सकता और स्पष्ट किया कि पुलिस अधिकारी द्वारा की जाने वाली गिरफ्तारी केवल एक वैधानिक विवेकाधिकार है, जिसे अनिवार्य नहीं माना जा सकता।

न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन. के. सिंह की पीठ ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तारी की शक्ति की व्याख्या एक सख्त वस्तुनिष्ठ आवश्यकता के रूप में की जानी चाहिए, न कि पुलिस अधिकारी की सुविधा के रूप में।

न्यायालय ने कहा, ‘‘इसका यह मतलब नहीं है कि पुलिस अधिकारी महज पूछताछ करने के लिए किसी को गिरफ्तार कर सकता है। हालांकि, इसका अर्थ यह है कि पुलिस अधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि सात वर्ष तक की कारावास की सजा वाले अपराध के संबंध में जांच संबंधित व्यक्ति को हिरासत में लिए बिना प्रभावी ढंग से आगे नहीं बढ़ सकती। इसके विपरीत कोई भी व्याख्या बीएनएसएस, 2023 की धारा 35(1)(ख) और धारा 35(3) से 35(6) के उद्देश्य को स्पष्ट रूप से विफल कर देगी।’’

पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध अपील की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

शीर्ष अदालत इस प्रश्न पर विचार कर रही थी कि क्या बीएनएसएस, 2023 की धारा 35(3) के तहत नोटिस उन सभी मामलों में अनिवार्य रूप से जारी किए जाने हैं जो सात साल तक के कारावास के अपराध से संबंधित हैं।

शीर्ष अदालत ने कहा कि बीएनएसएस, 2023 की धारा 35(3) के तहत जारी नोटिस के प्रावधानों के तहत गिरफ्तारी की शक्ति नियमित मामला नहीं, बल्कि एक अपवाद है, और पुलिस अधिकारी से उक्त शक्ति का प्रयोग करते समय सतर्क और संयमित रहने की अपेक्षा की जाती है।

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘पुलिस अधिकारी द्वारा गिरफ्तारी मात्र एक वैधानिक विवेकाधिकार है जो उसे साक्ष्य एकत्र कर उचित जांच करने में सहायता पहुंचाती है, इसलिए इसे अनिवार्य नहीं कहा जा सकता।’’

न्यायालय ने कहा कि पुलिस अधिकारी को उक्त कार्रवाई करने से पहले स्वयं से यह प्रश्न पूछना चाहिए कि गिरफ्तारी आवश्यक है या नहीं।

पीठ ने कहा, ‘‘किसी ऐसे अपराध के संबंध में गिरफ्तारी करने के लिए, जिसके लिए सात साल तक की कारावास की सजा हो सकती है, बीएनएसएस, 2023 की धारा 35(1)(बी)(आई) का आदेश और बीएनएसएस, 2023 की धारा 35(1)(बी)(2) में उल्लेखित किसी एक शर्त की मौजूदगी आवश्यक है।’’

जनवरी में पारित और हाल में न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किये गए अपने आदेश में पीठ ने कहा कि भले ही बीएनएसएस, 2023 की धारा 35(1)(बी) के तहत उल्लेखित शर्तों के अनुसार, किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी की परिस्थितियां उपलब्ध होने के बावजूद गिरफ्तारी नहीं की जाए, जब तक कि यह बिल्कुल आवश्यक न हो।

न्यायालय ने कहा, ‘‘यह कहना ही पर्याप्त है कि गिरफ्तारी के बिना भी जांच जारी रह सकती है। संज्ञेय अपराध के घटित होने के संबंध में अपनी राय बनाने के उद्देश्य से साक्ष्य एकत्र करने की प्रक्रिया के दौरान, पुलिस अधिकारी को स्वयं से यह प्रश्न पूछना चाहिए कि क्या गिरफ्तारी आवश्यक है।’’

पीठ ने कहा, ‘‘यह सुरक्षा उपाय इसलिए प्रदान किया गया है कि किसी भी मामले में, किसी आरोपी व्यक्ति को गिरफ्तार करने की शक्ति हमेशा एक पुलिस अधिकारी के पास होती है, भले ही उसने शुरूआत में ऐसा न करने के अपने कारणों को लिखित रूप में दर्ज कर लिया हो।’’

शीर्ष अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारी द्वारा की जाने वाली जांच आम तौर पर किसी अपराध के संबंध में विवरण दर्ज करने के साथ शुरू हो जाती है और यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका मुख्य उद्देश्य कथित अपराध से संबंधित तथ्यों और परिस्थितियों का पता लगाना है तथा इसमें पुलिस अधिकारी द्वारा साक्ष्य एकत्र करने के लिए घटना स्थल पर जाना शामिल है और यह आरोप पत्र दाखिल करने के लिए राय बनाने के साथ समाप्त होती है।

न्यायालय ने कहा कि गिरफ्तारी जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस अधिकारी द्वारा की गई कार्रवाई है और यह किसी विशेष मामले के तथ्यों के आधार पर विवेकाधीन और वैकल्पिक है।

भाषा सुभाष धीरज

धीरज