मुंबई, छह फरवरी (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार के सकल उधारी लक्ष्य से जुड़ी चिंताएं दूर करने की कोशिश की और सभी से इसके बजाय शुद्ध उधारी के आंकड़ों पर ध्यान देने को कहा।
उन्होंने कहा कि शुद्ध उधारी लक्ष्य में केवल 20,000 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है, और शुद्ध उधारी में वृद्धि कुल बजट की तुलना में बहुत धीमी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले वित्त वर्ष में सरकार का उधारी कार्यक्रम सुचारू रूप से संचालित किया जाएगा।
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 17.2 लाख करोड़ रुपये उधार लेने की योजना बनाई है, जो 16.5 लाख करोड़ रुपये के बाजार अनुमान से काफी अधिक है। दूसरी ओर सरकार की शुद्ध उधारी 11.53 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 11.73 लाख करोड़ रुपये है।
आरबीआई गवर्नर ने स्पष्ट किया कि 17.2 लाख करोड़ रुपये की उच्च सकल उधारी वित्त वर्ष 2026-27 में होने वाली उच्च परिपक्वता के कारण है।
उधारी के ऊंचे आंकड़ों ने बजट पेश होने के तुरंत बाद निवेशकों में बेचैनी पैदा कर दी थी। इससे वित्तीय प्रणाली में दूसरों को उधार देने के लिए कम संसाधन बचते हैं।
मल्होत्रा ने द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद संवाददाताओं से कहा, ”अगर बजट में लगभग नौ प्रतिशत की वृद्धि हो रही है, तो जीडीपी में 10 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। हमें वास्तव में शुद्ध उधारी के आंकड़ों को देखना चाहिए।”
भाषा पाण्डेय प्रेम
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