प्रगतिशील केरलम में 19वीं सदी की सोच के लिए कोई जगह नहीं: कंथापुरम की टिप्पणी पर मुख्यमंत्री सतीशन

प्रगतिशील केरलम में 19वीं सदी की सोच के लिए कोई जगह नहीं: कंथापुरम की टिप्पणी पर मुख्यमंत्री सतीशन

प्रगतिशील केरलम में 19वीं सदी की सोच के लिए कोई जगह नहीं: कंथापुरम की टिप्पणी पर मुख्यमंत्री सतीशन
Modified Date: September 2, 2026 / 08:14 pm IST
Published Date: September 2, 2026 8:14 pm IST

तिरूवनंतपुरम, दो सितंबर (भाषा) केरलम के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने सुन्नी इस्लामी विद्वान कंथापुरम ए. पी. अबूबकर मुसलियार की उस टिप्पणी का बुधवार को कड़ा विरोध किया, जिसमें उन्होंने महिलाओं को घरों तक सीमित रखने की बात कही थी। सतीशन ने कहा कि ऐसी सोच केरल की प्रगतिशील परंपरा के अनुरूप नहीं है।

कंथापुरम की टिप्पणियों की कड़ी आलोचना करते हुए, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि न तो संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार और न ही पार्टी कंथापुरम के रुख का समर्थन करेगी।

राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में सतीशन ने कहा, ‘‘हम इस बयान से बिल्कुल सहमत नहीं हैं। यह प्रगतिशील केरल के अनुरूप विचार नहीं है। हम किसी भी तरह से इससे सहमत नहीं हो सकते।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी सोच 19वीं सदी की है और 21वीं सदी में इसके लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को समाज की मुख्यधारा का हिस्सा होना चाहिए।

सतीशन ने कहा, ‘‘हम 21वीं सदी में 19वीं सदी जैसी सोच जाहिर करने का कड़ा विरोध करते हैं। हमारा प्रगतिशील नजरिया यह है कि महिलाएं सिर्फ घरों तक सीमित न रहें, बल्कि वे जीवन के हर क्षेत्र में हिस्सा लें और मुख्यधारा का हिस्सा बनकर जिएं।’’

मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी उस विवाद के बीच आई है, जो रविवार को कोच्चि में एक इस्लामी सम्मेलन में कंथापुरम के संबोधन के बाद शुरू हुआ। कंथापुरम ने कहा था कि महिलाओं को सार्वजनिक मंचों पर लाने से ‘‘भारी तबाही’’ होगी और इस्लाम में इससे बचने के लिए महिलाओं के लिए पर्दा करने का नियम है।

सतीशन ने यह भी कहा कि इस तरह की सोच इस्लामी इतिहास की गलत व्याख्या के समान है।

उन्होंने पैगंबर मोहम्मद की पहली पत्नी खदीजा का उदाहरण देते हुए कहा कि वह एक सफल कारोबारी थीं। उन्होंने पैगंबर की एक और पत्नी आयशा का भी उल्लेख किया और कहा कि उन्होंने जंग-ए-जमल में हिस्सा लिया था और नेतृत्व की भूमिका निभाई थी।

सतीशन ने रानी बिलकिस का उदाहरण देते हुए कहा कि इस्लामी इतिहास में उन्हें एक शासक के रूप में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘इस्लामी इतिहास में एक ऐसी महिला का उदाहरण है, जो कारोबार करती थीं, एक ऐसी महिला का उदाहरण है, जिन्होंने सैन्य नेतृत्व की भूमिका निभाई और एक महिला ऐसी थीं, जो रानी थीं। ये सभी उदाहरण इस्लामी इतिहास में मौजूद हैं।’’

मुख्यमंत्री ने खलीफाओं के शासनकाल की एक घटना का भी उल्लेख किया, जब एक महिला ने मेहर (विवाह के समय पति की ओर से पत्नी को दी जाने वाली धनराशि) से जुड़े एक फैसले पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा कि उस समय शासक ने स्वीकार किया था कि महिला का तर्क सही था।

सतीशन ने कहा, ‘‘ये उदाहरण दिखाते हैं कि महिलाओं की शाही दरबार तक में अपनी जगह थी। इसलिए, हम इस तरह की सोच से किसी भी तरह सहमत नहीं हो सकते।’’

भाषा सुभाष माधव

माधव


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