न्यायालय ने तमिलनाडु के मछुआरों पर ‘पर्स सीन फिशिंग’ को लेकर ‘अलिखित प्रतिबंध’ पर नाराजगी जताई
न्यायालय ने तमिलनाडु के मछुआरों पर ‘पर्स सीन फिशिंग’ को लेकर ‘अलिखित प्रतिबंध’ पर नाराजगी जताई
नयी दिल्ली, दो सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को तमिलनाडु सरकार द्वारा मछुआरों पर लगाए गए उस “अलिखित प्रतिबंध” पर नाराजगी जताई, जिसके तहत केंद्र के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) ‘पर्स सीन’ जाल का इस्तेमाल करने के लिए प्रवेश पास नहीं दिए जा रहे थे। न्यायालय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के लिए सहकारी संघवाद के सिद्धांत का पालन करना जरूरी है।
‘पर्स सीन’ मछली पकड़ने का एक ऐसा तरीका है जिसमें खुले पानी में मछलियों के झुंड को घेरने के लिए नाव से जुड़े एक खड़े जाल का इस्तेमाल किया जाता है।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने फैसला सुनाया कि अब सभी पक्षों के अधिकारों और दायित्वों का निर्धारण संबंधित कानूनों, ईईजेड नियम, 2025 और तमिलनाडु समुद्री मत्स्य विनियमन नियम, 2020 के अनुसार किया जाएगा।
पीठ ने कहा कि पर्स सीन जाल से मछली पकड़ने के लिए विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में प्रवेश और राज्य के प्रादेशिक जल क्षेत्र से होकर गुजरने से जुड़े मुद्दों को लेकर कानून, नियम और विनियम लागू हो चुके हैं और प्रभावी रूप से काम कर रहे हैं।
न्यायालय ने कहा, “इन नियमों और विनियमों को प्रभावी और कुशलतापूर्वक लागू करने के लिए, केंद्र और राज्य सरकारों के लिए सहकारी संघवाद के सिद्धांत का पालन करना आवश्यक है।
केंद्र और राज्य प्रशासन, दोनों की यह जिम्मेदारी है कि वे न केवल अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में संबंधित नियमों को लागू करें, बल्कि यह भी सुनिश्चित करें कि संबंधित लोग अनुच्छेद 19(1)(जी) के तहत अपने मौलिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए आसानी से आवेदन कर सकें और उनके आवेदनों को कुशलतापूर्वक मंजूरी मिल सके—बशर्ते ये अधिकार उचित नियमों के अधीन हों।”
स्थिति की वास्तविकता पर गौर करते हुए पीठ ने कहा कि ईईजेड नियम, 2025 के तहत मछली पकड़ने वाले पोतों के पंजीकरण और लाइसेंस से जुड़े पोर्टल (रियलक्राफ्ट पोर्टल) पर तीन अगस्त, 2026 तक प्रवेश पास के लिए दिए गए आवेदनों की स्थिति काफी “चिंताजनक” है।
पीठ ने कहा कि यह केंद्र द्वारा नियुक्त जारी करने वाले प्राधिकरण और राज्य सरकार के अधिकारी के रूप में काम कर रहे सत्यापन प्राधिकरण के बीच “समन्वित प्रयासों की कमी” को दर्शाता है।
न्यायालय ने कहा कि 257 आवेदनों में से करीब 226 आवेदन अब भी तमिलनाडु सरकार के स्तर पर सत्यापन के लिए लंबित हैं।
पीठ ने कहा, “तमिलनाडु राज्य को निर्देश दिया जाता है कि वह इस विषय से जुड़े कानूनों और नियमों के अनुसार आवेदनों का प्रभावी, कुशल और समयबद्ध तरीके से निपटारा सुनिश्चित करे।”
भाषा प्रशांत रंजन
रंजन

Facebook


