तिरुवनंतपुरम, 29 जुलाई (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने पारंपरिक खानपान की परंपराओं को बनाए रखने संबंधी अपनी हालिया टिप्पणी का बचाव करते हुए बुधवार को कहा कि उनके बयान की व्याख्या चुनिंदा तरीके से की गई और इसमें महिलाओं के खिलाफ कुछ भी नहीं था।
राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल के जवाब में सतीशन ने कहा कि उन्होंने केवल माताओं से अपनी विशेष पाक परंपराओं को बच्चों तक पहुंचाने और परिवार में आने वाली बहुओं को भी, जहां उचित हो, इन परंपराओं को सिखाने का आग्रह किया था, ताकि यह विरासत खत्म न हो।
सतीशन ने कहा, ‘‘मेरी पहली बात यही थी कि इन परंपराओं को बच्चों तक पहुंचाया जाना चाहिए। क्या बच्चों का मतलब केवल बेटियां हैं? बिल्कुल नहीं। बहुओं को भी परिवार के पारंपरिक व्यंजन सीखने का सुझाव देने में महिलाओं के खिलाफ कुछ भी नहीं है।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी मां को गुजरे हुए 27 साल हो चुके हैं, लेकिन उनके हाथों से बनाए गए भोजन का स्वाद आज भी उनकी यादों में बसा हुआ है।
सतीशन ने मीडिया के एक वर्ग पर उनकी टिप्पणी को संदर्भ से हटाकर पेश करने और विवाद खड़ा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप मेरी आलोचना करना चाहते हैं तो ऐसे कई मुद्दे हैं जिन पर आप आलोचना कर सकते हैं। ऐसी बातों को न गढ़ें जो मैंने कभी कही ही नहीं। इससे केवल आपकी विश्वसनीयता प्रभावित होगी।’’
पिछले सप्ताह चेंगन्नूर में आयोजित एक कार्यक्रम में सतीशन ने कहा था कि माताओं को पारंपरिक व्यंजन बनाने की अपनी कला अपने बेटों की पत्नियों को भी सिखानी चाहिए। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना हुई और कई लोगों ने इसे ‘‘महिला विरोधी’’ टिप्पणी बताया।
‘‘पम्पा फेस्टिवल ऑफ डायलॉग्स’’ को संबोधित करते हुए सतीशन ने कहा था, ‘‘मुझे कुछ माताओं से एक शिकायत है। उनमें कुछ ऐसे पारंपरिक व्यंजन बनाने की विशेष प्रतिभा होती है, जिन्हें केवल वे ही बनाना जानती हैं। लेकिन वे इन व्यंजनों को अपने बच्चों को नहीं सिखातीं।’’
उन्होंने कहा था, ‘‘कम से कम उन्हें ये व्यंजन अपने बच्चों या उस व्यक्ति को जरूर सिखाने चाहिए, जो बाद में उनके बेटे की पत्नी बनती है। इससे इन व्यंजनों की विशिष्टता अगली पीढ़ी तक पहुंच सकेगी।’’
पूर्व सामान्य शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ माकपा नेता वी शिवनकुट्टी ने मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि यह केरल के स्कूल पाठ्यक्रम में बढ़ावा दिए जा रहे लैंगिक समानता के मूल्यों के विपरीत है।
भाषा मनीषा माधव
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