नीट-यूजी पेपर लीक मामले में नोटिस जारी; उच्चतम न्यायालय ने कहा: एनटीए ने सबक नहीं सीखा

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नीट-यूजी पेपर लीक मामले में नोटिस जारी; उच्चतम न्यायालय ने कहा: एनटीए ने सबक नहीं सीखा

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  • Publish Date - May 25, 2026 / 07:26 PM IST,
    Updated On - May 25, 2026 / 07:26 PM IST

नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि यह दुखद है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने पहले के नीट पेपर लीक से सबक नहीं सीखा है। न्यायालय ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के लिए परीक्षा एजेंसी की जगह एक मजबूत और स्वायत्त निकाय स्थापित करने संबंधी याचिकाओं पर केंद्र, एनटीए और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जवाब तलब किया।

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने निर्देश दिया कि याचिकाओं की प्रति अन्य पक्षों के अलावा सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को भी दी जाए। न्यायालय ने नीट परीक्षा आयोजित करने के लिए जिम्मेदार एनटीए को 2024 में अदालत द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुपालन पर बृहस्पतिवार तक एक हलफनामा दाखिल करने को कहा।

पीठ ने कहा, ‘‘यह दुखद है कि उन्होंने सबक नहीं सीखा है। यह मामला पहले भी इस अदालत में आया था। एक समिति, एक निगरानी समिति गठित की गई थी, जिसने कुछ सिफारिशें की थीं और उन्हें स्वीकार कर लिया गया था। हम चाहते हैं कि एनटीए समिति द्वारा सुझाई गई सिफारिशों के अनुपालन के लिए उठाए गए कदमों पर एक हलफनामा दाखिल करे।’’

शीर्ष अदालत ने फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (एफएआईएमए) द्वारा वकील तन्वी दुबे के माध्यम से दायर याचिका पर नोटिस जारी करते हुए कहा कि वह इस विषय से संबंधित सभी मामलों को एक साथ नत्थी कर रहा है।

न्यायालय ने केंद्र द्वारा नियुक्त भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख के. राधाकृष्णन के नेतृत्व वाली समिति को एनटीए के कामकाज में सुधार करने और उसके निर्देशों के अनुपालन के लिए उठाए गए कदमों का विस्तृत विवरण देने का निर्देश दिया।

शीर्ष अदालत ने सभी पक्षों को तीन दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को निर्धारित की।

एफएआईएमए ने बार-बार पेपर लीक होने के कारण 22 लाख से अधिक छात्रों के मौलिक अधिकारों पर ‘‘सीधे सीधे हमला होने’’ का हवाला देते हुए शीर्ष अदालत से सीधे हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया और एनटीए के पुनर्गठन या उसके स्थान पर राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) के संचालन के लिए एक मजबूत और स्वायत्त प्रणाली की स्थापना की मांग की है।

याचिका में यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि जब तक पुन: परीक्षा की देखरेख के लिए औपचारिक रूप से एक नयी समिति का गठन नहीं हो जाता तब तक एक उच्चस्तरीय निगरानी समिति नियुक्त की जाए।

याचिका में कहा गया है कि समिति में अध्यक्ष के रूप में उच्चतम न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और फॉरेंसिक वैज्ञानिक शामिल होने चाहिए, ताकि आगे कोई और डेटा लीक न हो।

चिकित्सा शिक्षा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एनटीए द्वारा तीन मई को आयोजित नीट-यूजी की परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बीच इसे 12 मई को रद्द कर दिया गया था, जिसकी जांच अब सीबीआई कर रही है।

परीक्षा रद्द किये जाने के बाद उच्चतम न्यायालय में कई याचिकाएं दायर की गई हैं। एफएआईएमए की याचिका में कहा गया है कि राजस्थान पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) ने पता लगाया है कि वर्ष 2026 के लिए आयोजित नीट-यूजी के जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान के 120 प्रश्न व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर प्रसारित ‘अनुमानित प्रश्नपत्रों’ में शामिल प्रश्नों से मेल खाते थे।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि एनटीए द्वारा 5जी जैमर, जीपीएस ट्रैकिंग और एआई-नियंत्रित कैमरों सहित उच्च-तकनीकी सुरक्षा उपायों को अपनाए जाने के दावों के बावजूद, ये उपाय ‘केवल कागजों पर’ ही मौजूद थे।

याचिका में सीबीआई को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह पेपर लीक मामले की जांच के संबंध में चार सप्ताह के भीतर उच्चतम न्यायालय के समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत करे, जिसमें पहचाने गए नेटवर्क, इस सिलसिले में की गई गिरफ्तारियां, आरोपित व्यक्तियों और अभियोजन की प्रगति का विवरण शामिल हो।

याचिका में कहा गया है कि ‘अनियमितताओं का पारदर्शी रूप से पता लगाने’ के लिए एनटीए को 2026 के लिए आयोजित ‘नीट-यूजी’ के केंद्रवार परिणाम तुरंत प्रकाशित करने के लिए कहा जाए।

भाषा संतोष सुरेश

सुरेश