ओडिशा : बीजद आठ विधायकों को अयोग्य करार देने की अर्जी खारिज करने के खिलाफ अदालत पहुंचा

ओडिशा : बीजद आठ विधायकों को अयोग्य करार देने की अर्जी खारिज करने के खिलाफ अदालत पहुंचा

ओडिशा : बीजद आठ विधायकों को अयोग्य करार देने की अर्जी खारिज करने के खिलाफ अदालत पहुंचा
Modified Date: September 11, 2026 / 03:22 pm IST
Published Date: September 11, 2026 3:22 pm IST

भुवनेश्वर, 11 सितंबर (भाषा) ओडिशा में मुख्य विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने मार्च महीने में राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने वाले विधायकों को अयोग्य करार देने के लिए दी गई अर्जी विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी द्वारा खारिज किये जाने के खिलाफ उड़ीसा उच्च न्यायालय का रुख किया है। पार्टी पदाधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

विधानसभा में बीजद की मुख्य सचेतक और विधायक प्रमिला मलिक ने कहा कि उन्होंने बृहस्पतिवार को उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की है।

मलिक ने बताया कि याचिका में विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जो बीजद को अपनी बात रखने का मौका दिए बिना ‘एकतरफा’ तौर पर लिया गया है।

बीजद नेता ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘ विधानसभा अध्यक्ष ने हमारी याचिका पर सुनवाई किए बिना ही उसे खारिज कर दिया। पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष के सामने एक याचिका दायर की थी, जिसमें राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने वाले आठ विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग की गई थी। हमने उच्च न्यायालय से अपील की है कि वह पार्टी विरोधी गतिविधियों और पार्टी के सामूहिक फैसले को न मानने के कारण इन आठ विधायकों को अयोग्य घोषित करने का आदेश दे।’’

बीजद विधायक और पूर्व मंत्री अरुण कुमार साहू ने कहा कि पार्टी को पता था कि राज्यसभा चुनावों में व्हिप जारी करने का कोई प्रावधान नहीं है और सदस्य अपनी अंतरात्मा के अनुसार वोट देने के लिए स्वतंत्र हैं।

उन्होंने कहा कि हालांकि पार्टी ने आठ विधायकों पर पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने और चुनाव से पहले हुई जरूरी बैठकों में शामिल न होने का आरोप लगाया था।

इससे पहले जून में, विधानसभा अध्यक्ष पाढ़ी ने राज्यसभा चुनाव के बाद बीजद और कांग्रेस की ओर से दायर उन अलग-अलग याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इन याचिकाओं में 11 विधायकों (बीजद के आठ और कांग्रेस के तीन) को अयोग्य ठहराने की मांग की गई थी।

बीजद ने आरोप लगाया था कि आठ विधायकों – बालीगुडा के चक्रमणि कन्हार, बांकी के देवी रंजन त्रिपाठी, पटकुड़ा के अरविंद महापात्रा, चंपुआ के सनातन महाकुड, बस्ता की सुबासिनी जेना, जयदेव के नबा किशोर मल्लिक और कटक-चौद्वार के सौविक बिस्वाल – ने पार्टी के आधिकारिक रुख के खिलाफ काम करके संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दलबदल विरोधी प्रावधानों का उल्लंघन किया है।

भाषा धीरज मनीषा

मनीषा


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