सहारनपुर में मस्जिद के मौलवी से जुर्माना वसूली पर रोक

सहारनपुर में मस्जिद के मौलवी से जुर्माना वसूली पर रोक

सहारनपुर में मस्जिद के मौलवी से जुर्माना वसूली पर रोक
Modified Date: September 11, 2026 / 03:22 pm IST
Published Date: September 11, 2026 3:22 pm IST

प्रयागराज, 11 सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित एक मस्जिद के ध्वस्तीकरण के खिलाफ दायर एक रिट याचिका पर मस्जिद के मौलवी से 6.41 करोड़ रुपये जुर्माना वसूली पर अगली सुनवाई तक शुक्रवार को रोक लगा दी।

न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने इस मामले में राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय देते हुए अगली तिथि 12 अक्टूबर तय की और तब तक के लिए 6.41 करोड़ रुपये जुर्माने की वसूली पर रोक लगा दी।

भारत के संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत अधिवक्ता मोहम्मद तनवीर अहमद की ओर से दायर इस याचिका में सहारनपुर के नगर मजिस्ट्रेट द्वारा 16 जुलाई, 2026 को जारी आदेश एवं जिला न्यायाधीश द्वारा दो सितंबर, 2026 को जारी आदेश को चुनौती दी गई है।

इस रिट याचिका में सहारनपुर के जिला मजिस्ट्रेट के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार एवं कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद के मौलवी अब्दुल हमीद को प्रतिवादी पक्षकार बनाया गया है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष कुमार सिंह ने दलील दी कि बेदखली का आदेश, मालिकाना हक की पुष्टि किए बगैर पारित किया गया, जबकि उक्त संपत्ति वाहिद खान और याकूब खान के नाम पर दर्ज थी।

दूसरी ओर, अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका का यह कहते हुए विरोध किया कि याचिकाकर्ता ने स्वयं यह दलील दी थी कि मस्जिद वक्फ की संपत्ति है और सुन्नी सेंट्रल बोर्ड को इसमें पक्षकार नहीं बनाया गया है। इसलिए याचिकाकर्ता का पक्ष इसके विपरीत है।

उन्होंने कहा कि जहां एक ओर याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि संपत्ति जमीदार की है, वहीं दूसरी ओर इसे वक्फ की संपत्ति बताया गया, लेकिन वक्फ के प्रति समर्पण के बारे में कुछ भी नहीं है।

गोयल ने कहा कि संपत्ति कलेक्ट्रेट कचेहरी के नाम दर्ज है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि दस्तावेजों में विवादित संपत्ति वाहिद खान के नाम दर्ज थी। हालांकि, 1956 में इसे वाहिद खान, कलेक्ट्रेट कचेहरी और याकूब खान के नाम दर्ज कर दिया गया।

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि अधिकारियों द्वारा इस पर विचार नहीं किया गया और यह कहते हुए आदेश पारित कर दिया गया कि प्रविष्टियां फर्जी हैं और स्वामित्व का कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया।

उन्होंने यह दलील भी दी कि अपीलीय अदालत का यह गलत निर्णय था कि उक्त जमीन का स्वामित्व अंग्रेजों के शासनकाल में संघीय सरकार के पास था और इसके बाद यह राज्य सरकार में निहित हो गया। मस्जिद वक्फ में पंजीकृत थी, लेकिन इस पर विचार नहीं किया गया।

उल्लेखनीय है कि सहारनपुर के नगर मजिस्ट्रेट ने 16 जुलाई, 2026 को पारित आदेश के तहत परिसर खाली करने और 6.41 करोड़ रुपये जुर्माना भरने का आदेश पारित किया था।

नगर मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की गई थी जिसे जिला जज द्वारा दो सितंबर, 2026 को खारिज कर दिया गया। जिला जज के आदेश के बाद अधिकारियों ने पांच सितंबर को सुबह कलेक्ट्रेट परिसर में 315 वर्ग मीटर में बनी मस्जिद ध्वस्त कर दी।

भाषा सं राजेंद्र रंजन

रंजन


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