ओडिशा मंत्रिमंडल ने आर्थिक क्षेत्र विकास प्राधिकरणों के गठन संबंधी विधेयक को दी मंजूरी

ओडिशा मंत्रिमंडल ने आर्थिक क्षेत्र विकास प्राधिकरणों के गठन संबंधी विधेयक को दी मंजूरी

ओडिशा मंत्रिमंडल ने आर्थिक क्षेत्र विकास प्राधिकरणों के गठन संबंधी विधेयक को दी मंजूरी
Modified Date: August 2, 2026 / 10:11 am IST
Published Date: August 2, 2026 10:11 am IST

भुवनेश्वर, दो अगस्त (भाषा) ओडिशा सरकार ने शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (ईआरडीए) के गठन हेतु एक विधेयक विधानसभा में पेश करने को मंजूरी दे दी है।

शनिवार को यहां मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में आदिवासियों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए 2,995 करोड़ रुपये की परियोजना सहित कुल 11 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

बैठक के बाद मुख्य सचिव अनु गर्ग ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘मंत्रिमंडल ने राज्य में ईआरडीए की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करने के लिए ओडिशा विकास प्राधिकरण (ओडीए) अधिनियम, 1982 में संशोधन से जुड़े विधेयक को मंजूरी दे दी है।’’

उन्होंने कहा कि शहरीकरण आर्थिक विकास का प्रमुख आधार है। यह शहरों के समूहों (सिटी एग्लोमेरेशन्स) के सुनियोजित विकास का मार्ग प्रशस्त करता है, ताकि उन्हें आधुनिक बुनियादी ढांचे, रोजगार केंद्रों, बेहतर परिवहन व्यवस्था और समन्वित सार्वजनिक सेवाओं से युक्त एकीकृत आर्थिक गलियारों के रूप में विकसित किया जा सके।

मुख्य सचिव ने कहा, ‘‘ओडिशा ने भुवनेश्वर-कटक-पूरी-पारादीप आर्थिक क्षेत्र (बीकेपीपीईआर), बरगढ़-झारसुगुड़ा-संबलपुर, ब्रह्मपुर-छतरपुर-गोपालपुर और जयपुर-कोरापुट-सुनाबेड़ा जैसे शहर समूहों की परिकल्पना की है।’’

उन्होंने बताया कि नीति आयोग के सहयोग से प्रायोगिक परियोजना के तौर पर बीकेपीपीईआर के लिए एक आर्थिक योजना तैयार की गई है।

मुख्य सचिव ने बताया कि ओडिशा विकास प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पूरे ओडिशा में आर्थिक क्षेत्रों के समन्वित और एकीकृत विकास के लिए ईआरडीए के गठन, शक्तियों और कामकाज के लिए एक व्यापक वैधानिक ढांचा प्रदान करेगा।

एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में, कैबिनेट ने मुख्यमंत्री जनजाति जीविका मिशन(एमएमजेजेएम) 2.0 के कार्यान्वयन के प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह राज्यभर के आठ लाख आदिवासी और विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू की गई एक आजीविका पहल है।

गर्ग ने बताया कि कैबिनेट ने 2,995 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय परिव्यय के साथ 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों में एमएमजीएम 2.0 को लागू करने की स्वीकृति दी है, जिसे पूरी तरह से राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा।

भाषा खारी रंजन

रंजन


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