कंधमाल हिंसा पर 2008 की जांच आयोग रिपोर्ट गायब होने के मामले में ओडिशा सीआईडी ने शुरू की जांच

कंधमाल हिंसा पर 2008 की जांच आयोग रिपोर्ट गायब होने के मामले में ओडिशा सीआईडी ने शुरू की जांच

कंधमाल हिंसा पर 2008 की जांच आयोग रिपोर्ट गायब होने के मामले में ओडिशा सीआईडी ने शुरू की जांच
Modified Date: July 28, 2026 / 01:49 pm IST
Published Date: July 28, 2026 1:49 pm IST

भुवनेश्वर, 28 जुलाई (भाषा) ओडिशा पुलिस के अपराध शाखा विभाग (सीआईडी) ने विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेता लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या और उसके बाद 2008 में कंधमाल में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ी जांच आयोग की रिपोर्ट गायब होने के मामले में मंगलवार को मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

जब यह घटना हुई थी, तब राज्य में बीजू जनता दल (बीजद) की सरकार थी। इससे पहले इस मामले की जांच भुवनेश्वर-कटक पुलिस आयुक्तालय कर रहा था। लेकिन मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोमवार को मामले की जांच सीआईडी को सौंपने का आदेश दिया था।

रिपोर्ट गायब होने के मामले में 10 जून को राजधानी पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था, जिसकी जांच पुलिस आयुक्तालय कर रहा था। गृह विभाग के संयुक्त सचिव शरत चंद्र मरांडी की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

शिकायतकर्ता ने कहा था कि इन दोनों रिपोर्टों के गायब होने की परिस्थितियां इस बात का संदेह पैदा करती हैं कि दस्तावेजों को जानबूझकर हटाया गया, अपने पास रखा गया, छिपाया गया, नष्ट किया गया या किसी अन्य अवैध तरीके से इस्तेमाल किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने मामले को सीआईडी अपराध शाखा को उस समय सौंपा, जब तीन पूर्व आईएएस अधिकारियों — नौकरशाह से नेता बने वीके पांडियन, यूएन बेहरा और राजेश वर्मा — पूछताछ के लिए समन भेजे जाने के बावजूद जांच अधिकारी के सामने पेश नहीं हुए।

आरोप है कि जून 2024 में सत्ता परिवर्तन के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) से दो जांच आयोगों की रिपोर्ट गायब हो गई थीं। इसी दौरान बीजद सत्ता से बाहर हुआ था और राज्य में भाजपा की सरकार बनी थी।

ये तीनों पूर्व आईएएस अधिकारी बीजद सरकार के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात थे, जब न्यायमूर्ति एएस नायडू आयोग ने 2016 में अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी थी।

सीआईडी अपराध शाखा ने पुलिस महानिदेशक (सीआईडी) के आदेश पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें चोरी, आपराधिक विश्वासघात, सबूत गायब करने, साक्ष्य के रूप में पेश किए जाने से रोकने के लिए दस्तावेज नष्ट करने और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।

एक अधिकारी ने बताया कि सीआईडी के पुलिस उपाधीक्षक आशुतोष मिश्रा को मामले की जांच की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि सीआईडी अपराध शाखा के पुलिस अधीक्षक अनिरुद्ध राउत्रे जांच की प्रगति की निगरानी करेंगे।

नायडू आयोग की रिपोर्ट के अलावा 2016 में हुए सम अस्पताल अग्निकांड की राजस्व संभागीय आयुक्त जांच रिपोर्ट भी मुख्यमंत्री कार्यालय से गायब होने की बात सामने आई है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार सीआईडी अपराध शाखा केवल कंधमाल हिंसा से जुड़ी आयोग रिपोर्ट गायब होने के मामले की जांच करेगी।

फाइलों के गायब होने की घटना के बाद ओडिशा में राजनीतिक विवाद उठ गया है। खासतौर पर कंधमाल हिंसा से जुड़ी नायडू आयोग की रिपोर्ट को लेकर चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि यह रिपोर्ट कभी सार्वजनिक नहीं की गई थी।

बीजद ने आरोप लगाया है कि रिपोर्ट गायब नहीं हुई हैं, बल्कि भाजपा सरकार ने जनता का ध्यान भटकाने के लिए उन्हें दबा दिया है। पार्टी ने कहा कि सरकार पाठ्यपुस्तकों में गलतियों, बढ़ते अपराध और खाद की कमी जैसे मुद्दों से ध्यान हटाने का प्रयास कर रही है।

भाषा मनीषा माधव

माधव


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