नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) केंद्र सरकार ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि ओमान के अधिकारी इन दावों की जांच कर रहे हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य में एक पोत पर ड्रोन या मिसाइल हमले के बाद लापता भारतीय मर्चेंट नेवी कैप्टन आशीष कुमार के परिवार को फिरौती के लिए फोन आए थे।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ को केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि पोत से मिले बुरी तरह जले मानव अवशेषों की डीएनए जांच ओमान के अधिकारी नहीं कर सके और आशंका है कि ये अवशेष कुमार के हो सकते हैं।
यह मामला कुमार की पत्नी अंशु कुमारी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। अंशु ने कहा कि डीएनए जांच से कोई पुख्ता मिलान नहीं हो पाया है और परिवार को कथित तौर पर फिरौती के लिए फोन भी आए थे, इसलिए संभव है कि कैप्टन अभी जीवित हों।
सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को बताया कि अधिकारियों को परिवार की चिंताओं के बारे में जानकारी दी गई है।
मेहता ने कहा, ‘जो हड्डियां मिली थीं, वे इतनी ज्यादा जली हुई थीं कि डीएनए मिलान के लिए उनका विश्लेषण नहीं किया जा सका।’
कुमार की पत्नी के अनुसार, परिवार को मार्च में कई बार फिरौती के लिए फोन आए थे, जिसमें कथित तौर पर 20 लाख रुपये की मांग की गई थी।
भाषा जोहेब अविनाश
अविनाश