(मानस प्रतिम भुइयां)
नयी दिल्ली, छह मई (भाषा) पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के कुछ हफ्तों बाद शुरू किए गए ‘‘ऑपरेशन सिंदूर’’ ने ड्रोन के व्यापक उपयोग, नेटवर्किंग और लक्ष्य विश्लेषण एवं पहचान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के एकीकरण के जरिये भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में एक बड़ा बदलाव लाया।
इस अभियान को सीमा-पार आतंकवाद को लगातार समर्थन देने के लिए पाकिस्तान को दंडित करने के संबंध में पिछले आधी सदी में भारतीय सेना के सबसे व्यापक बहु-क्षेत्रीय युद्ध मिशन के रूप में वर्णित किया गया। इसने भारत के समग्र सुरक्षा और रणनीतिक लक्ष्यों को पुनर्परिभाषित किया।
भारत की इस कार्रवाई को व्यापक रूप से आतंकवाद के समर्थन के लिए पाकिस्तान को करारा जवाब देने की उसकी “राजनीतिक इच्छाशक्ति” के प्रदर्शन के रूप में देखा गया। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत इस्लामाबाद की किसी भी परमाणु धमकी को बर्दाश्त नहीं करेगा।
अभियान के बाद पिछले एक वर्ष के दौरान, भारत की तीनों सेनाओं ने नये प्लेटफॉर्म, मिसाइलों और विभिन्न प्रकार के लंबी एवं छोटी दूरी के ड्रोन की खरीद के साथ-साथ समग्र वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए व्यापक योजनाएं, रणनीतियां और नीतिगत पहल तैयार की हैं, ताकि उनकी युद्धक तैयारी को और सुदृढ़ किया जा सके।
पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने पिछले साल सात मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। इसके तहत भारत ने पाकिस्तान और इसके कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में स्थित नौ आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसमें कम से कम 100 आतंकियों के मारे जाने की बात कही गई।
आतंकी शिविरों पर किए गए हमलों में बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) का मुख्यालय, मुरीदके स्थित लश्कर-ए-तैयबा का अड्डा और सियालकोट के महमूना जोया, मुजफ्फराबाद के सवाई नाला और सैयद ना बिलाल, कोटली के गुलपुर और अब्बास, भीमबर के बरनाला और सरजल में स्थित आतंकी ढांचे शामिल थे।
इस कार्रवाई से पाकिस्तान के साथ तनाव में तेजी से वृद्धि हुई और पाकिस्तान ने जवाबी हमले किए, हालांकि उनमें से अधिकांश को भारतीय सेना ने विफल कर दिया।
दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच हॉटलाइन पर बातचीत के बाद 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनने के साथ ही सैन्य संघर्ष समाप्त हो गया, लेकिन इस घटना ने भारत की सैन्य शक्ति को बढ़ाने की आवश्यकता को उजागर कर दिया।
भारत ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया, लेकिन सेना के तीनों अंगों ने इन संघर्षों का विश्लेषण कर अपनी अभियानगत रणनीतियों को और बेहतर बनाने तथा उन्नत तकनीकों एवं प्लेटफॉर्म के एकीकरण पर काम किया।
तीनों सेनाएं विशेष रूप से मानव रहित प्लेटफॉर्म की खरीद और उच्चस्तरीय तकनीकों के समावेशन पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जिनमें लक्ष्य पहचान और निगरानी के लिए एआई का उपयोग भी शामिल है।
भारत ने पिछले एक साल में अपनी सैन्य शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि की है और इसका श्रेय सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार के समग्र दृष्टिकोण को जाता है।
सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से सीखे गए सबक निश्चित रूप से लागू किए जा रहे हैं।
संघर्ष के बाद के महीनों में सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति और प्राथमिकताओं के अनुरूप कई बड़ी खरीद परियोजनाओं को मंजूरी दी।
सेना की समग्र मारक क्षमता को और बढ़ाने के लिए स्वीकृत खरीद प्रस्तावों में रूस से पांच एस-400 मिसाइल प्रणालियों की एक नयी खेप हासिल करने और 60 मध्यम परिवहन विमानों की खरीद को हरी झंडी देना शामिल था।
मार्च महीने में ही सरकार ने 2.38 लाख करोड़ रुपये के सैन्य उपकरण खरीदने की मंजूरी दी।
सरकार ने फरवरी में एक अन्य प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसके तहत फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की जाएगी। यह योजना लगभग दो दशक पहले भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता बढ़ाने के लिए शुरू की गई थी।
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना की निगरानी और पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अमेरिका निर्मित छह बोइंग पी8-आई निगरानी विमान खरीदने को भी मंजूरी दी।
राफेल लड़ाकू विमान कई शक्तिशाली हथियारों को ले जाने में सक्षम हैं। यूरोपीय मिसाइल निर्माता एमबीडीए की मेटिओर बियॉन्ड विजुअल रेंज (बीवीआर) एयर-टू-एयर मिसाइल और स्कैल्प क्रूज मिसाइल राफेल विमानों के हथियार पैकेज का प्रमुख हिस्सा होंगी।
सरकार भारतीय नौसेना को छह स्टील्थ पनडुब्बियों की आपूर्ति के लिए पांच अरब यूरो के सौदे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में भी है। इन पनडुब्बियों का निर्माण जर्मन रक्षा कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (टीकेएमएस) और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) द्वारा किया जाएगा।
अप्रैल में, भारत ने अपनी तीसरी स्वदेशी निर्मित परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी, आईएनएस अरिदमन को नौसेना में शामिल किया।
भारत का परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (एसएसबीएन) कार्यक्रम एक बेहद गोपनीय परियोजना है। आईएनएस अरिहंत एसएसबीएन परियोजना के तहत पहली पनडुब्बी थी, जिसके बाद आईएनएस अरिघाट नामक एक और पनडुब्बी का निर्माण हुआ।
पिछले एक वर्ष के दौरान, भारत ने अग्नि मिसाइलों के कई संस्करणों सहित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हथियारों की एक शृंखला का सफलतापूर्वक परीक्षण भी किया है।
अगस्त में, भारत ने 5,000 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाली ‘अग्नि-5’ मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया।
अग्नि-5 मिसाइल चीन के सबसे उत्तरी भाग सहित लगभग पूरे एशिया और यूरोप के कुछ क्षेत्रों को अपनी मारक क्षमता के दायरे में ला सकती है।
भाषा आशीष सुरेश
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