जमशेदपुर, आठ अगस्त (भाषा) झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शनिवार को विपक्ष पर उनकी सरकार की ओर से गरीबों, आदिवासियों, मूलवासियों और किसानों के लिए किए जा रहे कार्यों में बाधा डालने का आरोप लगाया।
उलियान में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के पूर्व अध्यक्ष निर्मल महतो की 39वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद सोरेन ने कहा कि झारखंड वीरों की धरती है, जिन्होंने अलग राज्य के गठन और आदिवासियों एवं मूलवासियों के अधिकारों के लिए वर्षों तक संघर्ष किया और अपने प्राणों का बलिदान दिया।
उन्होंने कहा कि इन्हीं बलिदानों के बाद वर्ष 2000 में झारखंड को अलग राज्य का दर्जा मिला।
सोरेन ने आदिवासी योद्धाओं के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके समर्पण ने लोगों को एकजुट किया और अलग राज्य के आंदोलन को मजबूती दी।
उन्होंने कहा, ‘हमारे पूर्वजों के मार्गदर्शन और आशीर्वाद की वजह से झारखंड मुक्ति मोर्चा राज्य के लोगों को एकजुट करने और उनके लिए काम करने में सफल रहा।’
मुख्यमंत्री ने बिना किसी दल का नाम लिए आरोप लगाया कि बाद में राज्य की बागडोर ऐसी ताकतों के हाथों में चली गई, जो झारखंड के गठन के विरोध में थीं और ‘आदिवासी एवं मूलवासी विरोधी’ थीं।
उन्होंने कहा कि ऐसी ताकतों ने विकास को सही दिशा देने के बजाय अपने हितों के लिए राज्य में भय, शोषण और असुरक्षा की नींव रखी। यह टिप्पणी परोक्ष रूप से भाजपा की ओर इशारा करती है, जिसने राज्य गठन के बाद कई बार सरकार चलाई है।
सोरेन ने कहा, ‘हमने संघर्ष किया और कुछ समय के लिए राज्य की सत्ता संभालने में सफल रहे, लेकिन उन ताकतों ने साजिश कर हमारी सरकार गिराने में सफलता हासिल की।’
उन्होंने कहा कि झामुमो ने हार नहीं मानी और आदिवासियों, मूलवासियों, गरीबों तथा किसानों के अधिकारों के लिए अपना राजनीतिक संघर्ष जारी रखा।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘धनबल और साजिश समेत तमाम हथकंडों के बावजूद हमारा आंदोलन सफल हुआ और हमने उन्हें हटाकर राज्य की जिम्मेदारी संभाली।’ उन्होंने यह टिप्पणी परोक्ष रूप से 2019 के विधानसभा चुनाव परिणामों के संदर्भ में की।
विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि वह समाज में विभाजन पैदा करने की साजिश कर रहा है। हालांकि उन्होंने कहा कि झारखंड के लोग, खासकर आदिवासी और मूलवासी समुदाय, काफी संवेदनशील हैं और इसका उचित जवाब देने के लिए तैयार हैं।
झामुमो के तत्कालीन अध्यक्ष निर्मल महतो की आठ अगस्त 1987 को जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना क्षेत्र में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
भाषा
शुभम रंजन
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