केंद्र के खिलाफ विपक्षी दलों का मार्च, राहुल गांधी बोले- सरकार ने की लोकतंत्र की हत्या, देखिए वीडियो

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पेगासस मामला, कृषि कानूनों और अन्य मुद्दों को लेकर विपक्षी नेताओं का सरकार के खिलाफ प्रदर्शन | pegasus software india news headlines, pegasus software india news today, pegasus software india news live, pegasus software india news in hindi,

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  • Publish Date - August 12, 2021 / 11:23 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:23 PM IST

pegasus india news |नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और कई अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने पेगासस जासूसी मामला, केंद्रीय कृषि कानूनों और कुछ अन्य मुद्दों को लेकर बृहस्पतिवार को सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।

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राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के संसद भवन स्थित कक्ष में बैठक करने के बाद विपक्षी नेताओं ने संसद भवन से विजय चौक तक पैदल मार्च किया। इस दौरान कई नेताओं ने बैनर और तख्तियां ले रखी थीं। बैनर पर ‘हम किसान विरोधी काले कानूनों को निरस्त करने की मांग करते हैं’ लिखा हुआ था। विपक्षी नेताओं ने ‘जासूसी बंद करो’, ‘काले कानून वापस लो’ और ‘लोकतंत्र की हत्या बंद करो’ के नारे भी लगाए।

 

इससे पहले, विपक्षी नेताओं की बैठक में खड़गे, राहुल गांधी, लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश एवं आनंद शर्मा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव, द्रमुक के टी आर बालू, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा और कई अन्य विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए।

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सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में पेगासस जासूसी मामला, कृषि कानून, महंगाई और बुधवार को राज्यसभा में ‘सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में’ विधेयक पारित कराये जाने तथा कुछ महिला सांसदों के साथ कथित धक्कामुक्की को लेकर भी चर्चा की गई।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को आरोप लगाया कि सदन में विरोध प्रदर्शन के दौरान वहां मौजूद कुछ महिला सुरक्षाकर्मियों ने विपक्ष की महिला सदस्यों के साथ धक्कामुक्की की और उनका अपमान किया। हालांकि सरकार ने उनके आरोप को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह ‘सत्य से परे’ है।

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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने भी संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि उन्होंने अपने 55 साल की संसदीय राजनीति में ऐसे स्थिति नहीं देखी कि महिला सांसदों पर सदन के भीतर हमला किया गया हो।