अस्पताल अग्निकांड में हुई मौतों के विरोध में विपक्षी विधायकों ने विधानसभा में प्रदर्शन किया

Ads

अस्पताल अग्निकांड में हुई मौतों के विरोध में विपक्षी विधायकों ने विधानसभा में प्रदर्शन किया

  •  
  • Publish Date - March 25, 2026 / 04:32 PM IST,
    Updated On - March 25, 2026 / 04:32 PM IST

भुवनेश्वर, 25 मार्च (भाषा) ओडिशा में कटक के एक सरकारी अस्पताल में आग लगने से 12 मरीजों की मौत के मामले में स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी विधायकों ने बुधवार को विधानसभा में काली टी-शर्ट पहनकर प्रदर्शन किया।

पिछले एक सप्ताह से जारी इस मुद्दे पर विपक्षी विधायकों के प्रदर्शन के कारण कार्यवाही दिन भर में कई बार स्थगित करनी पड़ी।

पूर्वाह्न साढ़े 10 बजे प्रश्नकाल शुरू होते ही, बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस के सदस्य काली टी-शर्ट पहनकर आसन के समीप आ गए और सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे।

टी-शर्ट पर आगे की तरफ ‘कमजोर मुख्यमंत्री’ और पीछे की तरफ ‘मजबूत स्वास्थ्य मंत्री’ लिखा था।

प्रदर्शनकारियों ने 16 मार्च को एससीबी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के ट्रॉमा केयर आईसीयू में लगी आग के कारण हुई मौतों के लिए महालिंग को जिम्मेदार ठहराया और उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की।

अध्यक्ष सुरमा पाधी की बार-बार अपील के बावजूद प्रदर्शन जारी रहा और इस बीच सत्ता पक्ष के सदस्यों ने भी बीजद के खिलाफ नारे लगाने शुरू कर दिए।

अध्यक्ष दोनों पक्षों को शांत करने में विफल रहीं इसलिए सदन को पूर्वाह्न साढ़े 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

सदन की कार्यवाही स्थगित होने के दौरान विपक्षी विधायक विधानसभा परिसर में स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ नारे लगाते हुए जुलूस निकालने लगे।

कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा, “विपक्ष के हंगामे के कारण अब तक सात दिन बर्बाद हो चुके हैं। राज्य को सदन चलाने में प्रतिदिन 68-70 लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं। अब तक लगभग 12 करोड़ रुपये बर्बाद हो चुके हैं।”

विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने एक बयान में महालिंग के इस्तीफे तक सदन के अंदर और बाहर अपना आंदोलन जारी रखने की घोषणा की थी, जिसके परिणामस्वरूप यह हंगामा हुआ।

विपक्ष की मुख्य सचेतक प्रमिला मलिक ने कहा, “मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री को बर्खास्त करके अपनी ताकत साबित करें। ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री बेबस हैं।”

जब कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो विपक्ष ने अपना विरोध जारी रखा और फिर हंगामे के बीच सदन से बहिर्गमन किया।

भाषा जितेंद्र नरेश

नरेश