नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) राज्यसभा में मंगलवार को शून्यकाल के दौरान विपक्षी सदस्यों ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हुए हंगामा किया और सदन से बहिर्गमन कर गए, जिसके बाद सदन के नेता जे पी नड्डा ने कहा कि विपक्ष सदन की कार्यवाही को बाधित कर रहा है और उसका यह आचरण निंदनीय है।
उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति सी पी राधाकृष्णन ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाने के बाद जब शून्यकाल शुरू करने के लिए कहा, तभी तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने व्यवस्था का प्रश्न उठाया। आसन की अनुमति मिलने पर उन्होंने कहा कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर चर्चा की मांग सदस्य लगातार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कल सदन के नेता ने कहा था कि चुनाव सुधार पर चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा ‘‘लेकिन एसआईआर पर चर्चा की मांग अब तक पूरी नहीं हुई है।’’
इस बीच, विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया।
कांग्रेस अध्यक्ष एवं सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि एसआईआर बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने कहा कि यह एक राज्य के बाद दूसरे राज्य में…. हर जगह हो रहा है और लोगों के नाम मतदाता सूचियों से हटाए जा रहे हैं।
हंगामे के बीच ही सभापति ने कहा कि चुनाव सुधार के मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है और आज वह कामकाज होने देना चाहिए जो आज की कार्य सूची में तय है। उन्होंने कहा ‘‘आप हर दिन सदन की कार्यवाही बाधित करते हैं और वे मुद्दे उठाते हैं जिनके बारे में स्पष्ट व्यवस्था दी जा चुकी है।’’
इस पर असंतोष जताते हुए विपक्षी सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए।
सदन के नेता एवं केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा ने कहा ‘‘मैंने कल भी यह बात कही थी और आज भी कह रहा हूं कि विपक्ष की मंशा कभी भी, किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने की नहीं होती। वे गंभीर मुद्दों पर भी गंभीरता नहीं दिखाते।’’
उन्होंने कहा ‘‘आज ये लोग एसआईआर का मुद्दा लेकर आए। चुनाव सुधार पर करीब 15 घंटे चर्चा हो चुकी है जिसमें एसआईआर पर भी सबने अपनी अपनी बात रखी थी। लेकिन मंत्री के के जवाब से पहले ही ये लोग सदन से बहिर्गमन कर गए।’’
नड्डा ने विपक्ष पर संसदीय परंपराओं को बाधित करने तथा चर्चा में व्यवधान डालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा ‘‘ये इनका रवैया है। इनको प्रजातांत्रिक व्यवस्था में और लोकतांत्रिक परंपराओं-मानकों में विश्वास नहीं है। ये हमेशा अवरोध पैदा करते हैं, और यह आचरण निंदनीय है। मैं इसकी घोर निंदा करता हूं।’’
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मनीषा सुभाष
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