दूरसंचार सचिव को गवाह के रूप में बुलाने की मारन की अर्जी मंजूर करने वाला आदेश रद्द

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दूरसंचार सचिव को गवाह के रूप में बुलाने की मारन की अर्जी मंजूर करने वाला आदेश रद्द

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  • Publish Date - August 21, 2026 / 04:08 PM IST,
    Updated On - August 21, 2026 / 04:08 PM IST

नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश को शुक्रवार को रद्द कर दिया जिसके तहत सुनवाई अदालत को द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के लोकसभा सदस्य दयानिधि मारन के खिलाफ “अवैध” टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित करने से जुड़े मामले में केंद्रीय दूरसंचार सचिव को अदालत के गवाह के रूप में तलब करने का निर्देश दिया गया था।

न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति अरुण पल्ली की पीठ ने उच्च न्यायालय के 25 मार्च के आदेश को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह कदम उठाया।

पीठ ने कहा, “अब जबकि हम सुनवाई अदालत के आदेश को बहाल करने का मन बना चुके हैं तो हम प्रतिवादी (मारन) को दूरसंचार सचिव को बचाव पक्ष के गवाह के तौर पर बुलाने की इजाजत देते हैं, जैसा कि हमारे 10 अगस्त के आदेश में कहा गया था।”

उसने कहा, “हम उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द करते हैं और सुनवाई अदालत के फैसले को बहाल करते हैं। हम प्रतिवादी को यह विकल्प देते हैं कि अगर वह चाहे तो दूरसंचार सचिव को बचाव पक्ष के गवाह के तौर पर बुला सकता है।”

सुनवाई के दौरान मारन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने दूरसंचार सचिव को बचाव पक्ष के गवाह के तौर पर बुलाए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि दूरसंचार सचिव को अदालत के गवाह के तौर पर तलब करना ज्यादा उचित होगा।

शीर्ष अदालत ने 10 अगस्त को मारन की ओर से पेश वकीलों से पूछा था कि दूरसंचार सचिव को बचाव पक्ष के गवाह के तौर पर क्यों नहीं बुलाया जा सकता।

उसने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू से भी पूछा था कि अगर दूरसंचार सचिव को बचाव पक्ष के गवाह के तौर पर बुलाया जाए, तो क्या उन्हें कोई आपत्ति होगी।

राजू ने शीर्ष अदालत से कहा था कि उन्हें ऐसे निर्देश पर कोई आपत्ति नहीं होगी।

मद्रास उच्च न्यायालय ने 25 मार्च को मारन की उस अर्जी को स्वीकार कर लिया था, जिसमें चेन्नई की सुनवाई अदालत में केंद्रीय दूरसंचार सचिव को मामले से जुड़े गवाह के तौर पर बयान दर्ज कराने के लिए बुलाने का अनुरोध किया गया था।

उच्च न्यायालय ने कहा था कि दूरसंचार सचिव की गवाही यह तय करने के लिए जरूरी है कि 2004 से 2007 के बीच केंद्रीय संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रहे मारन उस अवधि में सेवा श्रेणी के दूरसंचार कनेक्शन पाने के हकदार थे या नहीं।

सीबीआई का आरोप है कि मारन ने मंत्री पद का दुरुपयोग करते हुए दिल्ली में अपने विभिन्न आवास पर निजी टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित करवाए, जिनका इस्तेमाल सन नेटवर्क के व्यापारिक लेन-देन के लिए किया जाता था।

भाषा पारुल नरेश

नरेश