पथानमथिट्टा (केरल), 20 जून (भाषा) पथानमथिट्टा में एक ईसाई प्रार्थना केंद्र में रह रहे 17 वर्षीय लड़के से मारपीट के आरोपों को लेकर बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वहां रह रहे अन्य बच्चों के साथ भी इसी तरह का कथित दुर्व्यवहार हुआ था। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद जांच शुरू करने वाली बाल कल्याण समिति को इस बात के संकेत मिले हैं कि केंद्र में रह रहे अन्य बच्चों के साथ भी कथित तौर पर दुर्व्यवहार और शोषण किया गया था।
इडुक्की जिले की कट्टप्पना पुलिस ने पथानमथिट्टा स्थित ‘एलोहिम ग्लोबल वर्शिप सेंटर’ के तीन कर्मचारियों के खिलाफ अनक्करा निवासी एक लड़के को पीटने के आरोप में सबसे पहले 17 जून को मामला दर्ज किया था।
परिवार की आर्थिक परेशानियों को देखते हुए केंद्र ने लड़के की पढ़ाई में सहायता करने और बाद में उसे रोजगार दिलाने में मदद करने का वादा किया था जिसके बाद लड़का वहां रहने लगा था।
बाद में मामले को आगे की जांच के लिए पथानमथिट्टा जिले के इलावुमथिट्ठा थाने में स्थानांतरित कर दिया गया।
इसके बाद पथानमथिट्टा की बाल कल्याण समिति ने भी घटना की जांच शुरू की।
सीडब्ल्यूसी की अध्यक्ष लीना के. सुभाष ने यहां संवाददाताओं को बताया कि आरोप सामने आने के बाद प्रार्थना केंद्र बंद कर दिया गया था।
हालांकि, समिति ने केंद्र में रह चुके कई लोगों से बातचीत की। केंद्र में बुजुर्गों को भी रखा जाता था।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने वहां रह चुके एक व्यक्ति का बयान दर्ज किया है। हमने वहां अवैध रूप से रखे गए एक बच्चे को भी मुक्त कराया। हमें पता चला है कि वहां कई लोगों को उचित अनुमति के बिना रखा गया था।’’
सुभाष ने बताया कि प्रार्थना केंद्र में तीन बच्चे रह रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें जानकारी मिली है कि वहां एक महिला भी अपने बच्चे के साथ रह रही थी। उनका पता लगाया जाना है।’’
उन्होंने बताया कि मुक्त कराए गए बच्चों में से एक की चिकित्सकीय जांच में चोटों का पता चला।
सुभाष ने कहा, ‘‘बच्चों ने बताया कि उनके साथ मारपीट की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें बिना कोई मेहनताना दिए केंद्र में काम करने के लिए मजबूर किया जाता था।’’
पुलिस की जांच में सामने आया है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को पढ़ाई में सहायता और रोजगार दिलाने का वादा कर केंद्र में रखा जाता था।
पुलिस के अनुसार, अनक्करा का 17 वर्षीय लड़का पिछले कुछ महीनों से केंद्र में रह रहा था।
आरोप है कि उसकी पढ़ाई जारी रखने में कोई सहायता नहीं की गई और इसके बजाय उसे वहां काम करने के लिए मजबूर किया गया।
पुलिस ने किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
भाषा
सिम्मी रंजन
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