केरल में नशीले पदार्थों के खिलाफ मुहिम के तहत पिछले साल 30 हजार से अधिक मामले दर्ज: पुलिस प्रमुख

केरल में नशीले पदार्थों के खिलाफ मुहिम के तहत पिछले साल 30 हजार से अधिक मामले दर्ज: पुलिस प्रमुख

केरल में नशीले पदार्थों के खिलाफ मुहिम के तहत पिछले साल 30 हजार से अधिक मामले दर्ज: पुलिस प्रमुख
Modified Date: February 19, 2026 / 01:50 pm IST
Published Date: February 19, 2026 1:50 pm IST

(के. प्रवीण कुमार)

तिरुवनंतपुरम, 19 फरवरी (भाषा) केरल पुलिस के प्रमुख आर. चंद्रशेखर ने कहा कि मादक पदार्थों के इस्तेमाल और इनकी तस्करी के खिलाफ राज्य सरकार के ‘डी-हंट’ अभियान के तहत पिछले साल नशीले पदार्थों से संबंधित 30,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए।

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने ‘पीटीआई वीडियो’ को दिए साक्षात्कार में इस आरोप को खारिज किया कि केरल मादक पदार्थों का केंद्र बन गया है।

उन्होंने कहा कि दर्ज मामलों की अधिक संख्या मादक पदार्थों की गतिविधि बढ़ने का नहीं, बल्कि इनके खिलाफ कार्रवाई कड़ी होने का संकेत है।

पुलिस प्रमुख ने ‘डी-हंट’ अभियान के बारे में कहा कि यह पुलिस और आबकारी विभागों का समन्वित प्रयास है, जिसका उद्देश्य मादक पदार्थों की आपूर्ति और मांग संबंधी दोनों पक्षों पर कार्रवाई करना है।

चंद्रशेखर ने ‘सिंथेटिक’ मादक पदार्थों का इस्तेमाल बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया और कहा कि इनकी मांग बढ़ने के स्पष्ट संकेत हैं।

सिंथेटिक मादक पदार्थ ऐसे नशीले पदार्थ होते हैं जिन्हें रसायनों के इस्तेमाल से प्रयोगशालाओं में तैयार किया जाता है।

चंद्रशेखर ने कहा, ‘‘सिंथेटिक मादक पदार्थों की मांग बढ़ने की काफी संभावना है, क्योंकि हम एमडीएमए नियमित रूप से जब्त कर रहे हैं। इससे पता चलता है कि मांग में वृद्धि हुई है। हम इससे निपट रहे हैं और बहुत कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं।’’

पुलिस प्रमुख ने कहा कि पुलिस बल रोकथाम को अधिक महत्व दे रहा है और सामुदायिक सहयोग से पूरे राज्य में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मुख्य लक्ष्य मांग को कम करना है। हम ‘स्टूडेंट पुलिस कैडेट’, जनमैत्री पुलिस और मजबूत सामुदायिक भागीदारी की मदद से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं।’’

पुलिस महानिदेशक ने एक नयी पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस ने तिरुवनंतपुरम में ‘यंग इंडिया’ और ‘भारतीय उद्योग परिसंघ’ (सीआईआई) के साथ साझेदारी में ‘पोडा’ (नशीले पदार्थों के इस्तेमाल संबंधी रोकथाम) पहल की है।

उन्होंने कहा, ‘‘21 कंपनियां आगे आई हैं और 1,000 से अधिक कर्मचारियों ने स्वेच्छा से घोषणा की है कि वे मादक पदार्थों का इस्तेमाल नहीं करेंगे तथा वे आकस्मिक जांच के लिए तैयार हैं। यह बहुत अच्छी पहल है।’’

अधिकारी ने कहा कि इस कार्यक्रम का विस्तार पूरे राज्य में किया जाएगा।

केरल के मादक पदार्थों का केंद्र बनने के आरोप को खारिज करते हुए चंद्रशेखर ने कहा, ‘‘यह आरोप निराधार है। मामलों का पता चलने में निश्चित रूप से वृद्धि हुई है, जिसका मतलब है कि अधिकारी पहचान करने और कानूनी कार्रवाई करने के लिए बहुत मेहनत कर रहे हैं।’’

पुलिस प्रमुख ने बताया कि मंगलवार को विशेष अभियान के दौरान पुलिस ने 1,200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें सैकड़ों ऐसे लोग भी शामिल हैं जिनके खिलाफ वारंट लंबित थे।

उन्होंने बताया कि यह अभियान हाल में तिरुवल्ला में ‘पार्लर’ पर हुए उस हमले की पृष्ठभूमि में चलाया गया, जिसमें दिनदहाड़े एक महिला पर हमला किया गया था।

अधिकारी ने कहा कि लगभग 60,000 कर्मियों के बल में, जो प्रतिदिन 10,000 से 15,000 लोगों के साथ बातचीत करते हैं, असामान्य व्यवहार के केवल एक या दो मामले ही आते हैं, और ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाती है।

पुलिस प्रमुख ने कहा, ‘‘हमारे पास करीब 60,000 पुलिसकर्मी हैं। कुछेक उपद्रवी हो सकते हैं। हर दिन हम प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से 10,000 से 15,000 लोगों के जीवन से जुड़ते हैं। असामान्य व्यवहार के एक या दो मामले हमारे संज्ञान में आते हैं और हम उनका निश्चित रूप से संज्ञान लेते हैं तथा संबंधित अधिकारियों या कर्मियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करते हैं।’’

भाषा

सिम्मी मनीषा नेत्रपाल

नेत्रपाल


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