कॉजपा का संसद मार्च: 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी जख्मी, 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारी हिरासत में

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कॉजपा का संसद मार्च: 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी जख्मी, 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारी हिरासत में

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  • Publish Date - July 20, 2026 / 09:37 PM IST,
    Updated On - July 20, 2026 / 09:37 PM IST

नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) द्वारा आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान सोमवार को नयी दिल्ली जिले में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई झड़प में 100 से अधिक पुलिसकर्मी एवं प्रदर्शनकारी घायल हो गए।

वही पुलिस सूत्रों ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 5,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि झड़प तब शुरू हुई जब कॉजपा प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाकर्मियों पर कथित तौर पर पथराव किया, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि इस दौरान 100 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया और उन्हें दिल्ली के विभिन्न थानों में ले जाया गया।

सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें पुलिस हमले के जवाब में प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसाती और उन्हें संसद की ओर मार्च करने से रोकती नजर आ रही है।

पुलिस सूत्रों ने कहा कि वे सभी वीडियो की प्रामाणिकता की जांच कर रहे हैं और निष्कर्षों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

घायल पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों को इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जबकि सुरक्षा बलों ने स्थिति को नियंत्रण में लिया।

सूत्रों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने और उन्हें संसद भवन से दूर रखने के लिए नयी दिल्ली जिले में कई स्थानों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए।

पुलिस ने कहा कि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है, जबकि उच्च सुरक्षा वाले जिले में प्रमुख स्थानों पर सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है।

प्रदर्शनकारियों में कई छात्र और युवा थे। वे परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं पर जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉजपा के ‘चलो संसद’ मार्च के लिए एकत्र हुए थे।

यह मार्च संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आयोजित हुआ, जिसके कारण नई और मध्य दिल्ली में बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, संसद मार्ग, पटेल चौक, कांस्टीट्यूशन क्लब, शास्त्री भवन और इनके आसपास के इलाकों सहित विभिन्न स्थानों से 100 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया और उन्हें दिल्ली भर के विभिन्न थानों तथा अस्थायी हिरासत केंद्रों में ले जाया गया।

सूत्रों ने बताया कि हिरासत में लिए गए लोगों को सत्यापन और कानूनी औपचारिकताओं के बाद रिहा कर दिया जाएगा।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत लागू निषेधाज्ञा के बावजूद हजारों प्रदर्शनकारी मध्य दिल्ली में एकत्र हुए। इस धारा के तहत पूर्व अनुमति के बिना निर्धारित विरोध स्थलों को छोड़कर लोगों के जमा होने पर रोक होती है।

पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्ग, जंतर-मंतर और अन्य संवेदनशील स्थानों के आसपास बैरिकेड को तोड़ने का बार-बार प्रयास किया, जिस कारण सुरक्षाकर्मियों के साथ उनका टकराव हुआ।

संसद मार्ग के पास सुरक्षा बलों ने तब लाठीचार्ज किया जब प्रदर्शनकारियों के समूहों ने संसद की ओर मार्च करते समय कथित तौर पर बैरिकेड को पार करने की कोशिश की।

कई संपर्क मार्गों पर गतिरोध शाम तक जारी रहा क्योंकि प्रदर्शनकारी तितर-बितर होने के बाद फिर से एकत्र हो गए और उन्होंने अंदरूनी गलियों और वैकल्पिक मार्गों से संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया।

नयी दिल्ली के बड़े हिस्सों में भारी यातायात जाम देखा गया क्योंकि सुरक्षाकर्मियों ने सड़कों को सील कर दिया, वाहनों का मार्ग बदल दिया और संसद, सेंट्रल विस्टा, कनॉट प्लेस तथा आसपास के इलाकों में आवाजाही को प्रतिबंधित कर दिया।

एहतियात के तौर पर आसपास के कई मेट्रो स्टेशनों पर भी प्रवेश और निकास पर प्रतिबंध लगाया गया।

इससे पहले दिन में, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने, संयम बरतने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सुरक्षाकर्मियों का सहयोग करने की अपील की थी।

पुलिस ने एक पोस्ट में कहा, ‘दिल्ली पुलिस सभी प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने, संयम बरतने और शांति व सार्वजनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने में पुलिस का सहयोग करने की अपील करती है।’

पुलिस ने कहा, ‘सभी प्रतिभागियों से अनुरोध है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से व्यवहार करें, किसी भी गैर-कानूनी या हिंसक गतिविधि में शामिल होने से बचें और ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों व कर्मियों द्वारा दिए गए वैध निर्देशों का पालन करें।’

पुलिस ने लोगों को सोशल मीडिया पर अफवाहें या असत्यापित सामग्री प्रसारित न करने की भी सलाह दी।

पुलिस ने कहा कि नागरिकों से अनुरोध है कि वे केवल प्रमाणित स्रोतों पर भरोसा करें और शांति, सद्भाव व सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में दिल्ली पुलिस को अपना सहयोग दें।’

संसद सत्र और प्रस्तावित मार्च से पहले दिल्ली पुलिस हाई अलर्ट पर थी। पुलिस ने संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त कर्मियों, अर्धसैनिक बलों तथा त्वरित प्रतिक्रिया टीमों को तैनात किया था।

अधिकारियों ने बहुस्तरीय बैरिकेड लगाए थे, नयी दिल्ली जिले में प्रवेश स्थानों पर वाहनों की जांच तेज कर दी थी और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी मजबूत की थी।

नयी दिल्ली पुलिस उपायुक्त (डीसीप) सचिन शर्मा ने पहले स्पष्ट किया था कि संसद की ओर किसी भी मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं मांगी गई थी और न ही दी गई थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

विरोध प्रदर्शनों के बीच, दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों को खारिज करते हुए कई ‘फैक्ट-चेक’ भी जारी किए।

पुलिस ने उन आरोपों को खारिज कर दिया जिनमें दावा किया गया था कि विरोध प्रदर्शन के दौरान जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो के साथ पुलिस कर्मियों ने मारपीट की और उनके बाल खींचे।

पुलिस इन रिपोर्टें को पूरी तरह से झूठी और भ्रामक बताया।

पुलिस ने कहा, ‘किसी को निशाना बनाकर हमला नहीं किया गया और दुर्भावनापूर्ण बल प्रयोग या व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाने के दावे पूरी तरह से निराधार हैं।’

यह स्पष्टीकरण कॉजपा के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास द्वारा ‘एक्स’ पर लगाए गए आरोपों के बाद आया। उन्होंने दावा किया था कि अंगमो पर हमला किया गया था और 12 वर्षीय लड़की सहित दर्जनों प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं।

पुलिस ने सोशल मीडिया पर आईं इन खबरों का भी खंडन किया कि कॉजपा संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में लिया गया है।

दिल्ली पुलिस ने ‘एक्स’ पर एक अन्य पोस्ट में कहा कि दीपके को हिरासत में लिए जाने की खबरें ‘पूरी तरह से झूठी’ हैं और दावा किया कि वह ‘मंच पर उपलब्ध’ थे।

इससे पहले, दास ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया था कि दीपके को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। उन्होंने संसद सदस्यों से प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने की अपील की थी।

संसद मार्ग के कई और वीडियो ऑनलाइन सामने आए जहां कुछ लोग घायल अवस्था में देखे जा सकते हैं और उनके सिर या चेहरे से खून बह रहा है।

यह प्रदर्शन शुरू में परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं पर केंद्रित था और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल पर बैठने के बाद यह और तेज हो गया।

स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद सफदरजंग अस्पताल में स्थानांतरित किए गए वांगचुक ने अस्पताल अधिकारियों से अस्थायी रूप से बाहर जाने और मार्च में भाग लेने की अनुमति मांगी थी। उन्होंने कहा था कि वह स्वस्थ महसूस कर रहे हैं।

अस्पताल के नवीनतम मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, उनके स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण मानक स्थिर हैं लेकिन उनके रक्त मानकों पर निगरानी की आवश्यकता है।

कॉजपा ने स्पष्ट किया कि उसकी मांगों में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, परीक्षा से जुड़े मुद्दों के कारण कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजा और वांगचुक को अस्पताल से रिहा करना शामिल है।

नयी दिल्ली जिले में देर शाम तक सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए संसद मार्ग, सेंट्रल विस्टा, जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस तथा अन्य संवेदनशील स्थानों पर दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त कंपनियां तैनात रहीं।

भाषा नोमान नोमान रंजन

रंजन