जम्मू, 14 जनवरी (भाषा) लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने बुधवार को कहा कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक समस्याओं, खासकर अपनी खराब वित्तीय स्थिति से ध्यान हटाने के प्रयास में ड्रोन भेजने सहित सीमा पर शरारत कर रहा है।
यहां ‘पीटीआई वीडियो’ से बात करते हुए गुप्ता ने शक्सगाम घाटी पर चीन के दावे को भी खारिज कर दिया और कहा, ‘यह 1962 का भारत नहीं है। यह 2026 का भारत है और उन्हें यह समझना चाहिए।’
सीमापार कम से कम आठ आतंकी शिविरों के सक्रिय होने के सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के बयान को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए, उपराज्यपाल ने कहा कि पाकिस्तान को अपने गलत व्यवहार की सज़ा भुगतनी पड़ेगी।
गुप्ता ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है। अगर पाकिस्तान इस तरह की गतिविधियां जारी रखता है, तो उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे।”
उन्होंने कहा, “बलूचिस्तान, सिंध, कराची और पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर जैसे स्थानों पर जिस तरह से अलगाववाद की आवाजें उठ रही हैं, उससे पाकिस्तान का अस्तित्व लंबे समय तक नहीं टिक पाएगा और उसका विघटन अपरिहार्य है।”
सीमा पार से लगातार हो रही ड्रोन गतिविधियों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सेना और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) पूरी तरह से सतर्क हैं और प्रभावी जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम हैं।
रविवार को, नौशेरा सेक्टर की सुरक्षा कर रहे कर्मियों ने गानिया-कलसियन गांव के ऊपर ड्रोन गतिविधि देखने के बाद मध्यम और हल्की मशीन गनों से गोलीबारी की।
उसी दिन, तेरियाथ के खब्बर गांव, राजौरी के कलाकोट, पुंछ जिले के मनकोट क्षेत्र के तैन-टोपा और सांबा के रामगढ़ सेक्टर के चक बाबराल गांव के ऊपर भी ड्रोन की गतिविधि देखी गई। हालांकि, ये ड्रोन कुछ ही मिनटों में वापस लौट गए।
उन्होंने कहा, “पाकिस्तान जानबूझकर अपनी आंतरिक समस्याओं, विशेषकर अपनी खराब वित्तीय स्थिति से ध्यान हटाने का प्रयास कर रहा है। हालांकि, ऐसे प्रयास सफल नहीं होंगे और भारत ऐसा होने भी नहीं देगा।”
शाक्सगाम को लेकर चीन के हालिया बयान पर उन्होंने कहा, ‘इस तरह का कोई भी दुस्साहस गलत है। चीन ने अरुणाचल प्रदेश के संबंध में अक्सर बयान दिए हैं, लेकिन यह 1962 का भारत नहीं है – यह 2026 का भारत है, और उन्हें यह समझना चाहिए।’
भारत द्वारा पिछले सप्ताह की गई टिप्पणियों के बाद, चीन ने सोमवार को शक्सगाम घाटी पर अपने क्षेत्रीय दावों को दोहाराय।
इस बीच गुप्ता ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच आगामी वार्ता के संतोषजनक परिणाम की उम्मीद जताई और कहा कि सभी मुद्दों को सुलझाने का सबसे अच्छा तरीका संवाद ही है।
गृह मंत्रालय ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय की अध्यक्षता में जनवरी के अंत में लद्दाख पर उच्चाधिकार समिति (एचपीसी) की बैठक बुलाने का हाल में निर्णय लिया है।
लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा और क्षेत्र को छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करने की मांग को लेकर लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (केडीए) संयुक्त रूप से आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं, और उन्होंने अतीत में एचपीसी के साथ कई दौर की वार्ता की है।
गुप्ता ने कहा, “इस तरह की बैठकें समय-समय पर होती रही हैं… गृह मंत्रालय ने इस महीने के अंत में समिति की बैठक बुलाई है और मेरा मानना है कि सदस्यों को यह समझना चाहिए कि जो भी चर्चा हो, वह संविधान के दायरे में और देश के हित में होनी चाहिए।’
भाषा नोमान मनीषा
मनीषा