पाकिस्तान दुनिया का सबसे ज्यादा प्रदूषित देश, भारत छठे नंबर पर: रिपोर्ट

Ads

पाकिस्तान दुनिया का सबसे ज्यादा प्रदूषित देश, भारत छठे नंबर पर: रिपोर्ट

  •  
  • Publish Date - March 24, 2026 / 08:17 PM IST,
    Updated On - March 24, 2026 / 08:17 PM IST

नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) पाकिस्तान दुनिया का सबसे प्रदूषित देश है, जबकि बांग्लादेश दूसरे और भारत छठे स्थान पर है। आठवीं विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट से यह जानकारी सामने आयी है।

स्विस वायु गुणवत्ता प्रौद्योगिकी कंपनी ‘आईक्यूएयर’ द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में 143 देशों, क्षेत्रों और भूभागों के 9,446 शहरों में स्थित निगरानी स्टेशन से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है।

ये आँकड़े दुनिया भर के 40,000 से अधिक नियामक निगरानी केंद्रों और कम लागत वाले सेंसरों से प्राप्त किए गए हैं, जिनका प्रबंधन सरकारी एजेंसियों, विश्वविद्यालयों, गैर-लाभकारी संगठनों, निजी उद्यमों और जागरूक नागरिक वैज्ञानिकों सहित योगदानकर्ताओं के एक विस्तृत समूह द्वारा किया गया है।

विश्व के सबसे प्रदूषित देशों में चीन 20वें स्थान पर है, जबकि अमेरिका 120वें स्थान पर और ब्रिटेन 110वें स्थान पर है।

रिपोर्ट के अनुसार, केवल 13 देश या क्षेत्र – फ्रेंच पॉलिनेशिया, प्यूर्टो रिको, यूएस वर्जिन आइलैंड्स, बारबाडोस, न्यू कैलेडोनिया, आइसलैंड, बरमूडा, रीयूनियन, एंडोरा, ऑस्ट्रेलिया, ग्रेनाडा, पनामा और एस्टोनिया – विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के वार्षिक औसत पीएम 2.5 दिशानिर्देश को पूरा कर पाये हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘143 देशों या क्षेत्रों में से 130 (91 प्रतिशत) विश्व स्वास्थ्य संगठन के वार्षिक औसत पीएम 2.5 दिशानिर्देश को पूरा नहीं कर पाये हैं। सबसे प्रदूषित पांच देश पाकिस्तान, बांग्लादेश, ताजिकिस्तान, चाड और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य हैं। दुनिया के 25 सबसे प्रदूषित शहर भारत, पाकिस्तान और चीन में हैं, जिनमें से चार सबसे प्रदूषित शहरों में से तीन भारत में हैं।’’

दक्षिण अफ्रीका का न्यूबॉउटविल शहर दुनिया का सबसे स्वच्छ शहर है, जहां पीएम 2.5 की वार्षिक औसत सांद्रता 1.0 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर है।

शहरों में, उत्तर प्रदेश का लोनी सबसे प्रदूषित है। उसके बाद चीन के होतान और भारत में मेघालय के बर्नीहाट का स्थान आता है। दिल्ली चौथे स्थान पर है, उसके बाद पाकिस्तान के फैसलाबाद का नंबर आता है।

रिपोर्ट में कहा गया है,‘‘ 2025 में, जंगल की आग की घटनाओं ने उन क्षेत्रों को बुरी तरह प्रभावित किया, जहां ऐतिहासिक रूप से पीएम2.5 का स्तर अपेक्षाकृत कम रहा है। परिणामस्वरूप, 2025 में वैश्विक शहरों में से केवल 14 प्रतिशत ही डब्ल्यूएचओ के वार्षिक पीएम2.5 दिशानिर्देश को पूरा कर पाए, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 17 प्रतिशत था।’’

भाषा राजकुमार दिलीप

दिलीप